फिजी को 70 मिलियन डॉलर की मदद करेगा भारत, तीन समझौतों पर हस्ताक्षर तीन देशों के दौरे के बाद स्वदेश लौटे मोदी, कई समझौतों पर किये हस्ताक्षर विश्व बैंक :इबोला बीमारी से मरने वालों की संख्या 5420 पहुंची गृहमंत्री ने कहा, जम्मू-कश्मीर में चुनावी मुद्दा नहीं बनेगा अनुच्छेद 370 रामपाल की जमानत याचिका खारिज, 2 बजे होगी पेशी
नवाज शरीफ नोबेल पुरस्कार कार्यक्रम में शिरकत नहीं करेंगे भारतीय-अमेरिकी के नाम पर अमेरिका में बिजनेस स्कूल भारतीय-अमेरिकी प्रोफेसर थॉमस कैलथ को नेशनल मेडल ऑफ साइंस मोदी और ओबामा ने ऑप एड पेज पर लिखा संयुक्त आलेख नरेंद्र मोदी और ओबामा की वार्ता से नई उम्मीदें: विशेषज्ञ

दर्द – वेद व्यथित


उन्हें इस बात का बहुत दुःख था कि जब उन्हें दर्द होता है तो वह दूसरे को कैसे विश्वाश दिलाये कि उन्हें दर्द हो रहा है बुखार जुकाम आदि तो आसानी से सब को पता चल जाता है परन्तु डॉ का कैसे पता चले परन्तु मैं यह सोचता हूँ कि यह दर्द ही सब से ज्यादा दिखाई देता है और विभिन्न रूपों में विभिन्न प्रकार से प्रकट होता है अपितु यह प्रकट हो कर बहुत जो २ करता है तो बस पूछो ही मत इस से तो अच्छा है यह प्रकट ही नं हो तो कितना अच्छा हो परन्तु प्रकट हो जाये तो लेने के देने पड़ जाते है इस लिए अच्छा है इस दर्द को छुपाये ही रखो परन्तु दर्द है कि छुपता ही कहाँ है सात ताले तो कहने भर की बात है हजार तालों में भी दर्द नही छुप सकता है आखिर बाहर आ ही जाता है और बाहर आया नई कि बस आते ही मीडिया तो कुछ भी तेज नही है उस के आगे अपितु उस से तो बहुत अधिक जिस तेज गति से चलता है तो उसे वापिस लौटना तो असम्भव ही हो जाता है |

अपने मन के दर्द को जो उसे प्रति पल बेचैन किये हुए था क्यों कि रोटी पानी तो तजा बसी किस अभी हो देर सबेर पच ही जाता है उसे पचाना तो आसन है परन्तु मन में बार २ उठ रहे दर्द को पचाना कोई आसन काम नही है किसी बातको पचाने का दर्द जो झेलता है वह ही उसे जानता है क्यों कि नाई ने बेशक नगर से बहुत दूर जंगल में जा कर यह दर्द व्यक्त किया था कि राजा के सिर में सिंग है और नाई का यह दर्द बाहर आते ही राजा के पास यूं पहुंचा जैसे गाँव में बी पी एल कार्ड बन रहे हो या ब्लैक मेलर पत्रकार अपने स्रोत को  कैसे भी ढूंढ ही लेता है ऐसे ही राजा तक नाई का यह दर्द पहुंच ही गया |
चलो यह तो ग्रामीण कथा कहानी है परन्तु राजा धृतराष्ट्र का दर्द था कि मुकुट मेरे सिर पर रहे या मेरे नही तो मेरे बेटे के सिर पर रखा जाये | इसी दर्द को उस ने बहुत छुपाया कि यह बाहर न आये परन्तु दर्द तो दर्द ही है उसे तो बाहर आना ही है और यह दर्द जैसे २ बाहर आया तो दुनिया को ऐसा दर्द दिया कि ” जाको घटो या भारत ते अब लौ नाही भरयो ” | बताओ क्या जरूरी था इस दर्द को बाहर आना क्या ही अच्छा होता कि राजा के मन में यह कहीं पड़ा रहता तो लाखों आदमी और निरीह पशु मारे जाने से बच जाते पर नही दर्द बाहर आ कर ही रहा और देखो दर्द ने बाहर आते ही कैसी मरकत मचवाई |
महाभारत से पहले भी ऐसा ही दर्द रानी केकई को को भी हुआ उस के  भी मन में दर्द हुआ कि मेरा बेटा ही राजा बने चाहे बेटे ने ऐसा नही चाहा तो भी रानी के मन में तो यह दर्द था ही और उन के इस दर्द ने बाहर आते अयोध्या ने  जो मरघट का रूप लिया वह किसी से भी छुपा हुआ नही है काश राज माता कैकई का यह दर्द बाहर न आता तो न तो राजा दशरथ की अकाल मृत्यु   होती न ही भगवान जी को चौदह वर्ष के लिए वनवास जाना पड़ता औं न ही सूर्पनखा की नाक कटती ,न हनुमान जी पूंछ में आग लगती न कीमती सोने की लंका ही जलती  और न ही युद्ध होता कितना बढिया होता उन का दर्द बाहर न आता |
आखिर दर्द तो दर्द ही है जब उठता है तो किसी के रोकर से नही रूकता है आप कितना  भी कोशिश कर लो इसे रोकने कि लाख कोशिशों के बाद भी नही रुकता है चाहे कपड़े ही खराब क्यों न हो जाएँ पर उसे बाहर आना ही है और वह बाहर आ ही जाता है यह एक बड़ी सच्चाई है आप इसे भली भांति जानते हैं परन्तु जान कर भी क्या हो सकता है आखिर आदमी तो आदमी ही है वह कोई भगवान तो है नही इसी लिए वह दर्द को रोकने के लिए बेशक कितने भी जोर लगा ले परन्तु रुकता कहाँ है और फूट २ कर बाहर आता ही रहता है फर्क बस इतना है कि कभी बड़े सभी तरीके से बाहर आता है और कभी बड़े असभ्य तरीके से या कभी वीभत्स या गंदे व हिंसक तरीके से भी व्यक्त होता है पर होता जरूर है |
पूरे विश्व के लोगों का ही दर्द के मामले में एक जैसा ही हाल है बल्कि  हमारे देश से ज्याद खतरनाक ढंग से तो विदेशों म व्यक्त होता है क्योंकि वहाँ माँ- बाप तक को कोई नही छोड़ता जरा सा बच्चे को कुछ कह कर दिखाओ कि बस बच्चा पुलिस को फोन कर देता है और पुलिस भी तुरंत हाजिर हो जाती है वह यहाँ की तरह थोड़ी है कि पहले तो पुलिस का नम्बर ही नही मिलता और यदि गलती से मिल भी जाये तो क्या वह समय पर आ ही जाएगी भूल जाओ यदि ऐसा सोचोगे तो आप को और दर्द होगा उस से पहले तो पीजा हाजिर हो जायेगा |
पर इस में पुलिस भी क्या करे उसे भी तो बहुत से दर्द सताते रहते हैं कभी गुंडे नेताओं की सेवा में लगाये जाने का दर्द और कभी गुंडों को मिले हुए राजनितिक संरक्षण का दर्द और यदि कोई उत्साही पुलिस वाला कोशिश भी करे तो जरूरी नही उस की गाड़ी उस का साथ ही दे हो सकता है वह बीच में ही रुक जाये परन्तु अपराधी तो बढिया गाड़ियों में बैठ कर, ये जा और वो जा वे कोई इन के आने का इंतजार थोड़ी करते रहेंगे|
पुलिस ही क्यों यहाँ तो सब के अपने २ दर्द हैं किसी भी दफ्तर में चले जाओ सब अपने दर्द को औरों को देने के चक्कर में रहते हैं और इतना दर्द देते हैं कि आप को रिश्वत देनी ही पड़ेगी , नही तो इतना दर्द होगा कि उसे झेलना दूभर तो  हो ही  जायेगा  साथ ही बहुत सा नुकसान भी उठाना पड़ेगा परन्तु रिश्वत के थोड़े से दर्द को झेल कर आप दूसरे दर्दों से आसानी से बच जाते हैं |
यह दर्द इतना व्यापक है कि गृहस्थ , गृहस्थ संतो और महात्माओं तक ने इस की व्यापकता को आसानी से स्वीकार कर लिया और उन्हें भी कहाँ पड़ा ” नानक दुखिया सब संसार” अर्थात दुनिया में कोई भी व्यक्ति ऐसा नही है जो दुःख यानि दर्द से अछूता हो या जिस को कोई न कोई दुःख दर्द न हो और यदि यही दर्द दिल में हो जाये तो बस पूछो मत या तो आप अपने दूसरे दर्द पैदा करते हुए दिल के दर्द का बिल भर दें नही तो यह दर्द आप को सीधा उपर से आया टिकट भी सिद्ध हो सकता है और आप चुपचाप अपने शश्वत गन्तव्य की ओर बढ़ चलें परन्तु जहाँ जाना है वहाँ ही कोई नही जाना चाहता और जो होना है उसे कोई होने नही देना चाहता इसी लिए वह दुनिया में कितने ही दर्द झेल २ कर जीता रहता है और दर्दों को हंसी ख़ुशी झेलने की कोशिश  भी करता रहता है |
व्यक्ति केवल दर्द को झेलता ही नही है अपितु उन्हें दूर करने के लिए इस दर्द को औरों को भी बांटता रहता है | पडौसी  पडौसी को बांटता है ,सास बहू को बंटती है और बहू सास को , बाप बेटे को , बेटा बाप को, एक नेता दूसरे नेता को, एक पार्टी  दूसरी पार्टी को और एक देश दूसरे देश  को दर्द को बांटता ही रहता है यानि हर कोई अपना दर्द दूसरे को दे देना चाहता है |
इस दर्द के कारण जहाँ पैसे का नुकसान होता है वही दूसरे नुकसान भी होते हैं जो देश को समाज को व्यक्ति को सभी को झेलने पड़ते हैं और इन के झेले बिना कोई गुजारा भी नही है क्योंकि हमारे यहाँ व्यवस्था ही ऐसी है जिस में दर्द की निरन्तरता बनी रहती है जिसे आप चाह कर भी न तो बदल सकते हैं और न ही उस से मुक्त हो सकता हैं |
इसी के चलते संसद का पैसा और समय दोनों तो बरबाद होते ही है अपितु जनता का भी खूब बेवकूफ या मूर्ख बनाया जाता है | घंटों बिना बात के पक्ष- विपक्ष एक दूसर से उलझते रहते हैं शोर होता रहता है और कई बार तो हाथापाई और शर्मनाक  तोड़फोड़ तक भी नौबत आ  जाती है क्यों कि विपक्ष को दर्द होता है अपने विपक्ष में होने का क्यों कि वे तो यह सोच कर चुनाव लड़े थे कि सता पर काबिज हो कर राज करंगे और खूब मलाई मरेंगे परन्तु हो गया उल्टा | सरकार बन नही पाई तो बैठना पड़ा विपक्ष में और यही दर्द उन्हें पूरे पांच साल तक होता रहता है जिस को निकलने के लिए कितना शोर शराबा वाक् आउट और न जाने क्या उन्हें करना पड़ता है |
परन्तु चलो यह तो विपक्ष है उन्हें तो दर्द होना ही है पर जो सत्ता पर काबिज हो गये हैं अब उन्हें भला क्या दर्द रह गया परन्तु अब उन्हें ही ज्यादा दर्द होता है क्यों कि जिस मलाई की विपक्ष को उम्मीद थी अब पूरी की पूरी यह ही चाट रहे हैं परन्तु विपक्ष उन्हें ठीक से कहाँ खाने देता है | कहते हैं बिल्ली यदि खा नही सकती तो उसे बिखेर देती है बस यही वहाँ भी होता है कि यदि हम नही कहा सके तो खाने तुम्हे भी नही देंगे बेशक बिखेर दे चाहे देश का कितना ही नुकसान क्यों न हो परन्तु सत्ता पक्ष तो सत्ता के नशे में चूर होता है वह समझता है कि अब तो मलाई पर हमारा ही अधिकार है सो हमे यह आराम से खाने दी जाये पर विपक्ष अडंगा लगता है तो पक्ष को इस से दर्द उठता है और वह अड़ जाता है कि जैसा हम चाहेंगे वैसा ही कानून बनाएंगै जो लोक पल बिल हम ने बनाया है वही पास करवाएंगे परन्तु विपक्ष भी अपना दर्द दूर करने के लिए अड़ जाता है कि हम  ऐसा नही होने देंगे और बस गई भैंस पानी में | देश जाये भाड़ में पता नही क्यों न मिल बैठ कर अपने २ दर्द बाँट लें कि भाई देश के बड़े दर्द का सोचो देश के लिए अपने २ छोटे २ दर्द भूल जाओ |
परन्तु यहाँ तो सब से पहले अपने दर्द की अहमियत अधिक है देश , समाज सब जाएँ भाड़ में न तो किसी को न्याय की चिंता है और न ही कानून की इस लिए सास को दर्द होता है कि बहू मेरे सामने कठपुतली की तरह क्यों नही नाचती और बहू को दर्द होता रहता है कि यह खूसट बुढिया हमेशा मेरे पीछे ही लठ ले कर पदी रहती है इसी तरह अड़ोसी पड़ोसी को दर्द होता है कि उस के लडके की शादी में कार आई है पर मेरे छोरे को क्यों नही मिली बस इसी दर्द को बहू पर सारे घरवाले निकलते रहते हैं और यहाँ तक कि बहू को भी घर से निकल देते हैं | वे न तो क़ानून की चिंता करते हैं और न ही समाज की | पर बेचारी बहू इस दर्द का क्या करे उसे मजबूरी में पुलिस  बुलानी पडती है उन का दर्द दूर करवाने के लिए |
चलो ये तो घरेलू झमेले हैं परन्तु अडोसी पडौसी को पता नही क्यों दर्द होता रहता है वे भी एक दूसरे की उन्नति को कहाँ सहन कर पाते हैं बेशक अपनी एक आँख फुडवा लें पर शर्त यह है कि पडौसी की दोनों फूड़वा कर ही अपना दर्द दूर करने पर तुले रहते हैं पडौसी  क्या समाज या पंचायत में भी लोग अपने २ दर्द को किन्ही और कारणों से कमजोर लोगों पर निकलते रहते हैं जब कि उन से कुछ नही कहते जो उन्हें उल्टा दर्दे पैदा कर सकते हैं इसी लिए स्वयं के दर्द को दूर करने के लिए उलटे सीधे फैंसले कर के कमजोरों को दर्द देते रहते हैं |
वास्तव में यह दर्द दर्द नही है अपितु अनंत हरी कथा है अब बताओ अनंत कथा का  भी कोई अंत हो सकता है क्या इस का कितना भी विस्तार कर लो यह तो बाढ़ के पानी की तरह बढ़ता ही रहता है और न ही इस का कोई उचित समाधान ही दिख परन्तु जो समाधान है उसे लोग करना भी नही चाहते यदि कोई कर भी ले तो निश्चित शिवत्व  प्राप्त हो सकता है क्यों कि  भगवान शिव  ही दुनिया में ओसे हुए हैं जिन्होंने अकेले इस दर्द के विष को अपने कंठ में धारण कर लिया और न तो स्वयं इस से प्रभावित हुए और न ही किसी दूसरे को प्रभावित होने दिया तभी तो वे शिव है यानि महा देव परन्तु हम बेशक पूरी तरह से शिव यानि कल्याण कारी न हो सकते हों परन्तु कोशिश तो कर ही सकते हैं कि हम अपने २ दर्द को अपने तक ही सीमित कर लें इसे बाहर ला कर दूसरों के दर्द का कारण न बनने दे ताकि दूसरों को तो हमारे कारण दर्द न हो |

डॉ. वेद व्यथित 

०९८६८८४२६८८ 



हिन्दी में राष्ट्रीय - अंतरराष्ट्रीय समाचार, लेख, भाषा - साहित्य एवं प्रवासी दुनिया से नि:शुल्क जुड़ाव के लिए
अपना ईमेल यहाँ भरें :

2 Comments

Leave a Reply