व्यावसायिक ब्लॉगिंग यानी कमाने का एक नया जरिया
जब अंग्रेजी में एक लोकप्रिय ब्लॉग ‘डिजिटल इंस्पिरेशन’ चलाने वाले अमित अग्रवाल ने कहा कि उन्हें गूगल एडसेंस के जरिए रोजाना एक हजार डॉलर तक की कमाई हो रही है तो भारतीय ब्लॉगरों में यकायक ही उत्साह, जोश और उम्मीदों का संचार हुआ। अंग्रेजी ही नहीं अन्य भाषाओं के ब्लॉगरों में भी। कुछ उत्साही युवा कामकाज छोड़कर पूर्णकालिक ब्लॉगर बन गए तो कुछ ने मीडिया हाउस की तर्ज पर अनेक ब्लॉगों की श्रृंखला शुरू कर दी। यूं तो कुछ ब्लॉगर बंधु पहले से ही गूगल प्रायोजित विज्ञापन लगा रहे थे, अब उनकी संख्या कई गुना उछल गई। एडसेंस विज्ञापनों को पाठक द्वारा क्लिक किए जाने पर ब्लॉग संचालक को एक बहुत छोटी, परिवर्तनशील राशि का भुगतान होता है। लेकिन वरिष्ठ ब्लॉगर रवि रतलामी को छोड़कर कोई हिंदी ब्लॉगर इस माध्यम से दस-बीस डॉलर से ज्यादा धन कमाने में नाकाम रहा। हां, इस प्रलोभन ने बड़ी संख्या में युवकों को हिंदी ब्लॉगिंग की ओर आकर्षित जरूर किया।
क्या सचमुच कोई ब्लॉगर अपने ब्लॉग के जरिए इतनी धनराशि कमा सकता है कि उसे कुछ और करने की जरूरत न पड़े? शायद हां, शायद नहीं। किसी भी अन्य माध्यम की भांति यहां भी बाजार के नियम लागू होते हैं। अच्छी गुणवत्ता तो ज्यादा ग्राहक, ज्यादा ग्राहक तो ज्यादा विज्ञापन, ज्यादा विज्ञापन तो ज्यादा विज्ञापन दर और फिर ज्यादा कमाई। इस मायने में हिंदी के ब्लॉग थोड़ी मार खा जाते हैं। एक तो इनके पाठकों की संख्या ही बहुत सीमित है, दूसरे ज्यादातर लेखों-टिप्पणियों में मौलिकता, रोचकता और गहराई का अभाव है। फिर एक समस्या यह है कि अधिकांश भारतीय विज्ञापनों पर गूगल उतना कमीशन नहीं देता जितना कि विदेशी विज्ञापनों पर। हिंदी के विज्ञापनों के साथ तो स्थिति और भी विकट है। अगर आपके ब्लॉग पर विदेशी विज्ञापन लगे हैं तो वे वैसे ही अपने हिंदी के बंदों के मतलब के नहीं हैं। यानी अंग्रेजी की तुलना में भाषायी ब्लॉगों के सामने समस्याएं कहीं ज्यादा हैं।
अगर आप व्यावसायिक ब्लॉगर बनना चाहते हैं तो सिर्फ टिप्पणी (पोस्ट) लिख देना भर ही काफी नहीं है, मुख्य बात है- अच्छा, श्रेष्ठ, उपयोगी लेखन। ऐसा लेखन, जो अन्य लोगों का ध्यान खींचे। ऐसा लेखन, जिसे ढूंढते हुए सर्च इंजनों के माध्यम से दुनिया के कोने-कोने से लोग आपके ब्लॉग पर पहुंचें। ऐसा लेखन, जिसे लोग सहेज कर रखना चाहें या अपने प्रकाशनों में छापना चाहें। सिर्फ आपसी दोस्तीदारी या प्रोत्साहन भर के लिए लोग आपके ब्लॉग पर न आएं। वह उन्हें खींचने की क्षमता रखता हो।
एक और तथ्य देखें। जितने भी (आर्थिक दृष्टि से) सफल अंग्रेजी ब्लॉगर हैं उनकी तकनीक पर अच्छी पकड़ है। उन्हें अपने लेखों के अधिकाधिक प्रचार-प्रसार के तरीके पता हैं। वे सामान्य मीडिया से अलग हटकर सामग्री दे रहे हैं। कभी गोपनीय या एक्सक्लूसिव सूचनाओं के जरिए, कभी विषय पर गहन शोध के जरिए और कभी विभिन्न स्रोतों पर उपलब्ध विषय वस्तु को रुचिकर और समग्र अंदाज में पेश करके। वे सरल भाषा का प्रयोग करते हैं और सरल मुद्दे उठाते हैं। अनावश्यक गांभीर्य और साहित्यिकता से दूर रहते हैं। यह समग्रता, नवीनता और एक्सक्लूसिवनेस उन्हें अद्वितीय बनाती है, उनकी मांग बढ़ाती है। खुद मीडिया भी अपने शोधकार्य के लिए उनका सहारा लेता है जिससे उन्हें प्रचार भी मिलता है, पाठक भी और प्रामाणिकता भी।
तकनीक का एक अच्छा इस्तेमाल इस रूप में किया जा सकता है कि ब्लॉगर उन विषयों पर लेख दें जिन्हें इंटरनेट पर सबसे ज्यादा खोजा जाता है। यानी वे अपनी विषय वस्तु को पाठकीय रुचि और जरूरत के अनुसार संशोधित या निर्देशित करें। उस पर भी सिर्फ अपने एकाकी, उत्साही मस्तिष्क में उपजे बिंदुओं को लिखने भर से बात नहीं बनने वाली। ब्लॉग को वैकल्पिक मीडिया के रूप में ले रहे हैं तो मीडिया वाली विशेषताएं भी लाएं। कॉपी पेस्ट वाली विषय वस्तु, अपने दार्शनिक विचार, समाचारों को जस का तस टीप देना, बहुत गूढ़ तकनीकी, सामाजिक व राजनैतिक लेख लिखना ब्लॉग से कमाई के मामले में आपको बहुत दूर नहीं ले जाएगा। न ही कुछ लोगों के बीच आपसी सहमति पैदा कर एक-दूसरे के ब्लॉगों पर क्लिक करना, पाठक से विज्ञापनों पर जाने का आग्रह करना या खुद ही इधर-उधर जाकर ऐसा करना कोई बहुत उत्पादक परिणाम देने वाला है। अंग्रेजी के सफल व्यक्तियों के ब्लॉगों से यही सीखने को मिलता है कि व्यावसायिक रूप से सफल होना है तो श्रेष्ठ सामग्री, श्रेष्ठ तकनीक, सुगम-सरल डिजाइन, खूब सारा रिसर्च, सर्च इंजन के अनुरूप सामग्री संयोजन, अन्य ब्लॉगरों के साथ गहरे लिंक, निरंतर अपडेशन, विश्वव्यापी ब्लॉगों का अध्ययन और इन सबसे ऊपर कुछ अनूठी, अलग, अद्वितीय विषय वस्तु होनी जरूरी है। यानी आपको एक अच्छे मैन्यूफैक्चरर, अच्छे पीआर मैनेजर और अच्छे मार्केटर तीनों की भूमिका निभाने की जरूरत है। बाप रे, बड़ी मेहनत का काम है!
-बालेन्दु दाधीच
(लेखक ‘प्रभासाक्षी’ के संपादक एवं सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ हैं)
प्रवासी टुडे, दिसम्बर 2008



















