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आप: आसमान से पाताल की ओर – डॉ. वेदप्रताप वैदिक


Dr.-Ved-pratap-Vaidik   नई दिल्ली,जनवरी 27 :   ‘आम आदमी पार्टी’   के लि  ए मैंने पिछले सप्ताह लिखा था कि यह कंप्यूटर और टीवी चैनलों की संतान है। यदि एक खटके में इसके पांच लाख सदस्य बन सकते हैं तो एक झटके में इसके दस लाख सदस्य गायब हो सकते हैं। पिछले तीन-चार दिनों के घटना-चक्र ने इस कथन को सत्य सिद्ध कर दिया है। ‘आप’ के सारे मंत्रियों और मुख्यमंत्री ने सरकार को मजाक बना दिया है। यदि उन्हें प्रतिरोध की नई परंपरा चलानी थी तो उसे अंजाम तक पहुंचाना चाहिए था। बीच में से ही धरना क्यों उठा दिया? उप-राज्यपाल ने ज़रा-सी गली क्या निकाली, आप भाग निकले। देश में कई नौजवानों और उग्र नैतिकतावादियों को ‘आप’ की आक्रामकता ठीक लगी थी और वे उसकी साहसिकता की प्रशंसा भी कर रहे थे लेकिन जिस तरह से छापे मारे गए, जिस तरह पुलिस से कानून का उल्लंघन करने का आग्रह मंत्रियों ने किया और जिस तरह धरने ने जन-जीवन को अस्त-व्यस्त किया, उसका परिणाम क्या हुआ? दिल्ली की जनता की नज़र में ‘आपका’ नेतृत्व दुराग्रही, अपरिपक्व और अहमन्य साबित हो गया। एक ही रात में उसकी जन-स्वीकृति 30 प्रतिशत गिर गई। लोकमत सर्वेक्षणों में अब लोकप्रियता की यह चट्टान लगातर नीचे लुढ़कती जा रही है। कांग्रेसी कह रहे हैं कि यदि दिल्ली का कानून मंत्री इस्तीफा नहीं देगा तो हम सरकार गिरा देंगे। अब कांग्रेस को दुगुना नुक्सान होगा। पहले सरकार बनवाने पर उसकी इज्जत घटी, अब सरकार गिरवाने पर घटेगी।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने किए पर फूले नहीं समा रहे।   वे कहते हैं, हां मैं अराजकतावादी हूं। क्या अरविंद को पता है कि अराजकतावाद क्या होता है?   क्या अरविंद ने आज तक किसी अराजकतावादी का नाम भी सुना है? गड़बड़ फैलाना, उटपटांग काम करना, कानून की अवहेलना करना और सरकार को कब्जाए भी रखना अराजकतावाद कहलाता है?   टीवी और अखबारों   से जन्मी इस पार्टी का जल्वा अपने आप फीका पड़ना शुरु हो गया है। जो पार्टी ज्वार की तरह उमड़ी थी, वह भाटे की तरह वीरान होनी शुरु हो गई है।   उसने विदेशी महिलाओं के साथ अशिष्टता करके देश के सुशिक्षित मध्य वर्ग को तो खिन्न किया ही है, अफ्रीकी देशों में भारतीय विदेश नीति को भी चोट पहुंचाई है। यह आंदोलन और यह पार्टी जैसे सेंत-मेंत में आसमान छूने लगी थी, वैसे ही अब यह पातालगामी बन गई है। देश के परिवर्तनकामियों के लिए यह अत्यंत दुखद है।

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