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क्या समय यात्रा संभव है?


एच जी वेल्स के उपन्यास “द टाईम मशीन” मे नायक एक विशेष कुर्सी पर बैठता है जिस पर कुछ जलते बुझते बल्ब लगे होते है, कुछ डायल होते है , नायक डायल सेट करता है, कुछ बटन दबाता है और अपने आपको भविष्य के हज़ारों वर्षों बाद में पाता है।

उस समय तक इंग्लैड नष्ट हो चुका होता है और वहां पर मार्लाक और एलोई नामक नये प्राणीयों का निवास होता है। यह विज्ञान फतांसी की एक महान कथा है लेकिन वैज्ञानिकों ने समय यात्रा की कल्पना या अवधारणा पर कभी विश्वास नही किया है। उनके अनुसार यह सनकी,रहस्यवादी और धुर्तो के कार्यक्षेत्र की अवधारणा है , उनके पास ऐसा मानने के लिये ठोस कारण भी है। लेकिन क्वांटम गुरुत्व (Quantum Gravity) मे आश्चर्यजनक रूप से प्रगति इस अवधारणा की चूलो को हिला रही है।

समय यात्रा की अवधारणा की राह में सबसे बड़ा रोड़ा इससे जुड़े पहेलीयों जैसे ढेर सारे विरोधाभास (Paradox) है।

विरोधाभास १:

इस उदाहरण के अनुसार कोई व्यक्ति बिना माता पिता के भी हो सकता है। क्या होगा जब कोई व्यक्ति भूतकाल में जाकर अपने पैदा होने से पहले अपने माता पिता की हत्या कर दे ? प्रश्न यह है कि यदि उसके मातापिता उसके जन्म से पहले मर गये तो उनकी हत्या करने के लिये वह व्यक्ति पैदा कैसे हुआ ?

विरोधाभास २:

यह ऐसा विरोधाभास है जिसमे एक व्यक्ति का कोई भूतकाल नहीं है। उदाहरण के लिये मान लेते है कि एक युवा आविष्कारक अपने गैराज में बैठ कर समययान मशीन बनाने की कोशिश कर रहा है। अचानक एक वृद्ध व्यक्ति उसके सामने प्रकट होता है और उसे समययान बनाने की विधि देकर अदृश्य हो जाता है। युवा आविष्कारक समय यात्रा से प्राप्त जानकारीयो से शेयर मार्केट, घुड़दौड़, खेलों के सट्टे से काफी सारा पैसा कमाकर अरबपति बन जाता है। जब वह बूढ़ा हो जाता है तब वह समय यात्रा कर भूतकाल में जाकर अपने ही युवावस्था को समययान बनाने की विधि देकर आता है। प्रश्न यह है कि समययान बनाने की विधि कहां से आयी ?

विरोधाभास ३:

इस विरोधाभास मे एक व्यक्ति अपनी ही माता है। ’जेन’ को एक अनाथालय में एक अजनबी छोड़ गया था। जब जेन युवा होती है उसकी मुलाकात एक अजनबी से होती है, उस अजनबी के संसर्ग से जेन गर्भवती हो जाती है। उस समय एक दुर्घटना घटती है। जेन एक बच्ची को जन्म देते समय मरते मरते बचती है लेकिन बच्ची का रहस्यमय तरीके से अपहरण हो जाता है। जेन की जान बचाते समय डाक्टरो को पता चलता है कि जेन के पुरुष और महिला दोनों जननांग है। डाक्टर जेन को बचाने के लिये उसे पुरुष बना देते है। अब जेन बन जाती है “जिम”।इसके बाद जिम शराबी बन जाता है। एक दिन उसे भटकते हुये एक शराबख़ाने में एक बारटेंडर मिलता है जो कि एक समययात्री होता है। जिम उस समययात्री के साथ भूतकाल मे जाता है वहां उसकी मुलाकात एक लड़की से होती है। वह लड़की जिम के संसर्ग में गर्भवती हो जाती है और एक बच्ची को जन्म देती है। अपराध बोध में जिम उस नवजात बच्ची का अपहरण कर उसे एक अनाथालय मे छोड़ देता है। बाद में जिम समययात्रीयो के दल में शामिल हो जाता है और भटकती जिन्दगी जीता है। कुछ वर्षों बाद उसे एक दिन उसे सपना आता है कि उसे बारटेंडर बनकर भूतकाल में एक जिम नामके शराबी से मिलना है। प्रश्न : जेन की मां, पिता, भाई, बहन, दादा, दादी, बेटा,बेटी, नाती, पोते कौन है?

इन्ही सभी विरोधाभासो के चलते समययात्रा को असंभव माना जाता रहा है। न्युटन ने समय को एक बाण के जैसा माना था, जिसे एक बार छोड़ दिया तब वह एक सीधी रेखा मे चलता जाता है। पृथ्वी पर एक सेकंड, मंगल पर एक सेकंड के बराबर था। ब्रह्मांड मे फैली हुयी घड़ीयां एक गति से चलती थी। आइंसटाईन ने एक नयी क्रांतिकारी अवधारणा को जन्म दिया। उनके अनुसार समय एक नदी के प्रवाह के जैसे है जो सितारो, आकाशगंगाओ के घुमावो से बहता है, इसकी गति इन पिंडो के पास से बहते हुये कम ज्यादा होती रहती है। पृथ्वी पर एक सेकंड मंगल पर एक सेकंड के बराबर नही है। ब्रह्मांड मे फैली हुयी घड़ीयां अपनी अपनी गति से चलती है। आइंस्टाईन की मृत्यु से पहले उन्हे एक समस्या का सामना करना पडा था। आइंस्टाइन के प्रिन्स्टन के पड़ोसी कर्ट गोएडल (जो शायद पिछले ५०० वर्षो के सर्वश्रेष्ठ गणितिय तर्क शास्त्री है) ने आईन्स्टाईन के समिकरणो का एक ऐसा हल निकाला जो समय यात्रा को संभव बनाता था। समय की इस नदी के प्रवाह मे अब कुछ भंवर आ गये थे जहां समय एक वृत्त मे चक्कर लगाता था ! गोयेडल का हल शानदार था, वह हल एक ऐसे ब्रह्मांड की कल्पना करता था जो एक घुर्णन करते हुये द्रव से भरा है। कोई भी इस द्रव के घुर्णन की दिशा मे चलता जायेगा अपने आपको प्रारंभिक बिन्दू पर पायेगा लेकिन भूतकाल मे !

अपने वृत्तांत मे आईन्स्टाईन ने लिखा है कि वे अपने समिकरणो के हल मे समययात्रा की संभावना से परेशान हो गये थे। लेकिन उन्होने बाद मे निष्कर्ष निकाला कि ब्रह्मांड घूर्णन नही करता है, वह अपना विस्तार करता है(महाविस्फोट – Big Bang Theory)। इस कारण गोएडल के हल को माना नही जा सकता। स्वाभाविक है कि यदि ब्रह्मांड घूर्णन करता होता तब समय यात्रा सारे ब्रह्मांड मे संभव होती।

१९६३ मे न्युजीलैंड के एक गणितज्ञ राय केर ने घूर्णन करते हुए ब्लैक होल के लिये आइंसटाईन के समिकरणो का हल निकाला। इस हल के कुछ विचित्र गुणधर्म थे। इसके अनुसार घूर्णन करता हुआ ब्लैक होल एक बिन्दु के रूप मे संकुचित ना होकर एक न्युट्रान के घुमते हुये वलय के रूप मे होगा। यह वलय इतनी तेजी से घुर्णन करेगा कि अपकेन्द्री बल(centrifugal force) इसे एक बिन्दु के रूप मे संकुचित नही होने देगा। यह वलय एक तरह से एलीस के दर्पण के जैसे होगा। इस वलय मे से जानेवाला यात्री मरेगा नही बल्कि एक दूसरे ब्रह्मांड मे चला जायेगा। इसके पश्चात आईन्सटाईन के समीकरणॊ के ऐसे सैंकड़ो हल खोजे जा चूके है जो समय यात्रा या अंतरिक्षीय सूराख़ों (Wormholes) की कल्पना करते है।

ये अंतरिक्षीय सूराख ना केवल अंतरिक्ष के दो स्थानो को जोड़ते है बल्कि दो समय क्षेत्रो को भी जोड़ते है। तकनीकी रूप से इन्हे समय यात्रा के लिये प्रयोग किया जा सकता है। हाल ही मे क्वांटम सिद्धांत मे गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत को जोड़ने के जो प्रयास हुये है उपर दिये गये विरोधाभासो के बारे मे कुछ और जानकारी दी है। क्वांटम भौतिकी मे किसी भी वस्तु की एक से ज्यादा अवस्था हो सकती है। उदाहरण के लिये एक इलेक्ट्रान एक समय मे एक से ज्यादा कक्षा मे हो सकता है(इसी तथ्य पर ही सारे रासायनिक सिद्धांत आधारित है)। क्वांटम भौतिकी के अनुसार स्क्राडीन्गर की बिल्ली एक साथ दो अवस्था मे हो सकती है, जीवित और मृत। इस सिद्धांत के अनुसार भूतकाल मे जाकर उसमे परिवर्तन करने पर जो परिवर्तन होगे उससे एक समानांतर ब्रम्हाण्ड बनेगा। मौलिक ब्रम्हाण्ड वैसा ही रहेगा।

यदि हम भूतकाल मे जाकर महात्मा गांधी को बचाते है तब हम किसी और के भूतकाल को बचा रहे होंगे, हमारे गांधी फिर भी मृत ही रहेंगे। महात्मा गांधी को हत्यारे से बचाने पर ब्रह्मांड दो हिस्सो मे बंट जायेगा, एक ब्रह्मांड जहां गाधींजी की हत्या नही हुयी होगी, दूसरा हमारा मौलिक ब्रह्मांड जहां गांधीजी की हत्या हुयी है। इसका मतलब यह नही कि हम एच जी वेल्स के समय यान मे प्रवेश कर समय यात्रा कर सकते है! अभी भी कई रोड़े है !

पहली, मुख्य समस्या है उर्जा ! एक कार के लिये जिस तरह पेट्रोल चाहीये उसी तरह समययान के लिये काफी सारी मात्रा मे ऊर्जा चाहिये! इतनी मात्रा मे ऊर्जा प्राप्त करने के लिये हमे किसी तारे की संपूर्ण ऊर्जा का उपयोग करने के तरीके सीखने होगें या असाधारण पदार्थ जैसे ऋणात्मक पदार्थ(Negative Matter) (ऐसा पदार्थ जो गुरुत्वाकर्षण से उपर जाये, निचे ना गिरे) खोजना होगा या ऋणात्मक ऊर्जा(Negative Energy) का श्रोत खोजना होगा। (ऐसा माना जाता था कि ऋणात्मक ऊर्जा असंभव है लेकिन अल्प मात्रा मे ऋणात्मक ऊर्जा का प्रयोगिक सत्यापन कैसीमीर प्रभाव(Casimir effect) से हो चूका है।) ऋणात्मक ऊर्जा का बड़े पैमाने पर उत्पादन कम से कम अगली कुछ शताब्दीयो तक संभव नही है। ऋणात्मक पदार्थ अभी तक खोजा नही गया है। ध्यान दे ऋणात्मक पदार्थ प्रतिपदार्थ (Antimatter) या श्याम पदार्थ(Dark Matter) नही है।

इसके अलावा समस्या स्थायित्व की भी है। केर का ब्लैक होल अस्थायी हो सकता है, यह किसी के प्रवेश करने से पहले ही बंद हो सकता है। क्वांटम भौतिकी के अंतिरिक्षिय सूराख भी किसी के प्रवेश करने से पहले बंद हो सकते है। दुःर्भाग्य से हमारी गणित इतनी विकसित नही हुयी है कि वह इन अंतिरिक्षिय सूराखो(Wormholes) के स्थायित्व की गणना कर सके क्योंकि इसके लिये हमे “थ्योरी आफ एवरीथिंग(Theory of Everything)” चाहिये जो गुरुत्व और क्वांटम भौतिकी के सिद्धांतो का एकीकरण कर सके। अभी तक थ्योरी आफ एवरीथिंग का एक ही पात्र सिद्धांत है सुपरस्ट्रींग थ्योरी(Super String Theory)। यह एक ऐसा सिद्धांत है जो अच्छी तरह से परिभाषित अवश्य है लेकिन इसका हल अभी तक किसी के पास नही है।

मजेदार बात यह है कि स्टीफन हांकिन्ग ने समय यात्रा की अवधारणा का विरोध किया था। उन्होने यह भी कहा था कि उनके पास इसके अनुभवजन्य प्रमाण है। उनके अनुसार यदि समय यात्रा संभव है, तब भविष्य से आने वाले समय यात्री कहां है ? भविष्य से कोई यात्री नही है, इसका अर्थ है समय यात्रा संभव नही है। लेकिन पिछले कुछ वर्षो मे सैधांतिक भौतिकी मे काफी नयी खोज हुयी है ,जिससे प्रभावित होकर हाकिंग ने अपना मत बदल दिया है। अब उनके अनुसार समय यात्रा संभव है लेकिन प्रायोगिक(practical) नही !

हमारे पास भविष्य से यात्री इस कारण नही आते होंगे क्योंकि हम इतने महत्वपूर्ण नही है। समय यात्रा कर सकने में सफल सभ्यता काफी विकसीत होगी, वह किसी तारे की सम्पूर्ण ऊर्जा के दोहन में सक्षम होगी। जो भी सभ्यता किसी तारे की ऊर्जा पर नियंत्रण कर सकती है उनके लिये हम एक आदिम सभ्यता से बढकर कुछ नही है। क्या आप चिंटीयो को अपना ज्ञान, औषधी या ऊर्जा देते है ? आपके कुछ दोस्तो को तो शायद उनपर पैर रख कर कुचलने की ईच्छा होती होगी।

कल कोई आपके दरवाजे पर दस्तक दे और कहे कि वह भविष्य से आया है और आपके पोते के पोते का पोता है तो दरवाजा बंद मत करिये। हो सकता है कि वह सही हो।

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