मोल्डिंग सिस्टम — अलका सिन्हा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ नीति आयोग की पहली बैठक 6 फरवरी भारत ने किया पृथ्वी-2 मिसाइल का सफल प्रायोगिक परीक्षण व्यक्ति पूजा को अनुचित नहीं मानता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
दिव्या माथुर की कहानी : अंतिम तीन दिन अमेरिकी कोर्ट ने सोनिया गांधी से पासपोर्ट दिखाने को कहा अमेरिकी न्यायाधीश ने 1984 के दंगों पर आदेश सुरक्षित रखा यमन में डूबा जहाज, 12 भारतीय नाविक हुए लापता पंजाबी गायक शिंदा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

Archive for the Category ‘साहित्य’


मोल्डिंग सिस्टम — अलका सिन्हा

Sunday, October 4th, 2015
मोल्डिंग सिस्टम  -- अलका सिन्हा रंजन का फोन आया था। खुशी से चहकते हुए उसने बताया कि वह थाइलैंड गया था और ताइक्वांडो में उसने थाइलैंड को हराकर सिल्वर मेडल जीता था। “गोल्ड क्यों नहीं?” मीठे उलाहने से मैंने पूछा था। “ये तो पहला मौका था भाभी, दिसंबर में चीन के साथ मैच है, तब गोल्ड मारूंगा।” ...

दिव्या माथुर की कहानी : अंतिम तीन दिन

Saturday, October 3rd, 2015
दिव्या माथुर की कहानी : अंतिम तीन दिन  अपने ही घर में माया चूहे सी चुपचाप घुसी और सीधे अपने शयनकक्ष में जाकर बिस्तर पर बैठ गई, स्तब्ध. जीवन में आज पहली बार, मानो सोच के घोड़ों की लगाम उसके हाथ से छूट गई थी. आराम का तो सवाल ही नहीं पैदा होता था. अब समय ही कहां ...

डॉ. जे़बा रशीद की कविताएँ

Friday, October 2nd, 2015
डॉ. जे़बा रशीद की कविताएँ जवाब मैंने खत भेजा तो  जवाब में सूखा गुलाब आया है हमने आंखों में सजा लिए आंसूं खूब जवाब आया है सकूने दिल की दवा मांगी तो दर्द बेहिसाब आया है। ख्वाहिशें मुस्करा कर कहती है खाली ख्वाब आया है। ***** 2 चाहते जे़बा रषीद चाहतों ने मेरी जिसको तराशा वो पारस हो यह जरूरी तो नहीं! ख्वाब मेरे हैं मगर ध्यान तेरा है मेरी आंखों में तेरी तस्वीर ना हो यह जरूरी तो नहीं! चाहत ...

आध्यात्मिक कविताएं- मृदुल कीर्ति

Friday, October 2nd, 2015
आध्यात्मिक कविताएं- मृदुल कीर्ति (अाध्यात्मिक जीवन के सत्यों , विचार बिदुओं को काव्य संवेदना में पिरो कर विचारों की ऋंखला बनाते हुए कविताओं की रचना डा मृदुल कीर्ति की एक प्रमुख विशेषता है। उनकी मुक्त छंद की कविताएं भी श्लोक या मंत्र की तरह हैं जो किसी न किसी आध्यात्मि्क सत्य का आविष्कार करती ...

मुझसे कैसा नेह – अलका सिन्हा

Thursday, October 1st, 2015
मुझसे कैसा नेह - अलका सिन्हा   गुड्डो का स्कूल ......................... ”बीबी जी, लगता है बिटिया का पेट दुखता है! लाओ, सरसों की बाती बनाकर सेक दें।“ कई बार आंखें मटकाती रामबाण औषधि बताती, ”छाती का दो बूंद दूध बिटिया की नाभि पर टपका दो, बुखार तुरंत उतर जाएगा...।“ और सचमुच ऐसा ही होता। मैंने उसका सारा ...

हास्य व्यंग्य – नया साल मुबारक – नरेंद्र कोहली

Thursday, October 1st, 2015
हास्य व्यंग्य - नया साल मुबारक - नरेंद्र कोहली    डाकिए ने अपने माथे का पसीना पोंछा और कुछ हाँफते हुए कहा, "नया साल मुबारक हो।" "इस ठंड में इतना पसीना क्यों आ रहा है भाई?"  मैंने कुछ सहानुभूति जताई। वह हँसा, "जब इतना बोझ लाद कर चलूँगा, तो पसीना तो आएगा ही। सारे देश को आ रहा है। साले कार्ड ...

23 मार्च : शहीद दिवस के अवसर पर-रंग दे बसंती चोला-दिव्या माथुर

Sunday, March 23rd, 2014
23 मार्च : शहीद दिवस के अवसर पर-रंग दे बसंती चोला-दिव्या माथुर (भगत सिंह और उसकी माँ के बीच वार्तालाप) ‘मेरा रंग दे बसंती चोला,’ माँ से भगत सिंह बोला तड़प के उसकी माँ बोली लाल मेरे तू अभी न जा ‘टोलकी वज रही वेड़े विच ते नचदे आंडे ग्वांडे ने कुड़ी हल्दी लाके राह तके व्याह ते तू हो जाने दे,’ ‘जलियाँ वाला बाग का बदला खून से गोरों के लूँगा तू ...

अबकी ऐसे फाग मनाएं – अलका सिन्हा

Monday, March 17th, 2014
अबकी ऐसे फाग मनाएं - अलका सिन्हा अबकी ऐसे फाग मनाएं, दीवारों पर रंग लगाएं।  रंग भरी भीगी दीवारें, महक उठें सोंधी दीवारें, नरम पड़ी गीले रंगों से, जहां-तहां टूटें दीवारें, मृदुल-प्रेम के भाव जगाएं। बरसे अबकी इतना रंग, बह जाएं गलियारे तंग, दीवारों से राह बने, आने का हो आमंत्रण, मिलकर सब जोगीरा गाएं। दीवारें घर के भीतर की, दीवारें मंदिर-मस्जिद की, ऊंची-नीची सब ...

चुटकी गुलाल की – शैल अग्रवाल

Sunday, March 16th, 2014
चुटकी गुलाल की - शैल अग्रवाल बरसाने लाल ने जब से सुनी है कि ब्रिटेन और फ्रांस क्या अमेरिका तक की पार्लियामेंट में दिवाली मनाई गईं, उनके मन में खलबली मच गई हैं। सर पर एक भूत सवार है कि इसबार विदेश में ही होली मनाएँगे वह भी। ऐसी होली कि दुनिया देखती रह जाए - ...

अक्ल और भैंस – फणीश्वरनाथ रेणु

Thursday, March 13th, 2014
अक्ल और भैंस - फणीश्वरनाथ रेणु    जब अखबारों में ‘हरी क्रान्ति’ की सफलता और चमत्कार की कहानियाँ बार-बार विस्तारपूर्वक प्रकाशित होने लगीं, तो एक दिन श्री अगमलाल ‘अगम’ ने भी शहर का मोह त्यागकर, खेती करने का फैसला कर लिया। गाँव में, उनके चार-पाँच बीघे जमीन थी जिन्हें बटाईदारी पर उठाकर, अगमलाल जी ‘अगम’ आज ...
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