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दिव्या माथुर की कहानी : अंतिम तीन दिन अमेरिकी कोर्ट ने सोनिया गांधी से पासपोर्ट दिखाने को कहा अमेरिकी न्यायाधीश ने 1984 के दंगों पर आदेश सुरक्षित रखा यमन में डूबा जहाज, 12 भारतीय नाविक हुए लापता पंजाबी गायक शिंदा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

Archive for the Category ‘एन आर आई फोरम’


आध्यात्मिक कविताएं- मृदुल कीर्ति

Friday, October 2nd, 2015
आध्यात्मिक कविताएं- मृदुल कीर्ति (अाध्यात्मिक जीवन के सत्यों , विचार बिदुओं को काव्य संवेदना में पिरो कर विचारों की ऋंखला बनाते हुए कविताओं की रचना डा मृदुल कीर्ति की एक प्रमुख विशेषता है। उनकी मुक्त छंद की कविताएं भी श्लोक या मंत्र की तरह हैं जो किसी न किसी आध्यात्मि्क सत्य का आविष्कार करती ...

अमर शहीद भगत सिंह की भतीजी एवं क्रान्तिकारी साहित्य लेखिका – वीरेंद्र सिन्धु

Sunday, March 23rd, 2014
अमर शहीद भगत सिंह की भतीजी एवं क्रान्तिकारी साहित्य लेखिका - वीरेंद्र सिन्धु प्रारंभिक जीवन: जन्म २७ जून १९४०, लायलपुर, पंजाब । स्वतंत्रता सेनानी पिता सरदार कुलतार र्सिंह उस समय लाहौर जेल में थे।  नन्हीं बालिका की अपने पिता के साथ प्रथम भेंट वहीँ हुई । १९४७ में भारत विभाजन के बाद अपने पुश्तैनी गांव खटकड़ कलां और बाद में सहारनपुर में निवास और ...

गणतंत्र दिवस – सुलेखा डोगरा

Monday, January 27th, 2014
गणतंत्र दिवस - सुलेखा डोगरा सोने की चिड़िया कहलाता था प्यारा हिंदुस्तान हमारा जान से भी अज़ीज़ है हमें, भारत देश हमारा कभी हम देश भक्ती के गीत गाते थे इसकी शान में हम सर अपना झुकाते थे यह गौरव था हमारा, यह प्रतीक था इमान का यह इतिहास है बलिदान का इसे आज़ाद करवाने में, कटाए कई ...

एक प्रार्थना नव वर्ष से – सुधा मिश्रा

Tuesday, December 31st, 2013
एक प्रार्थना नव वर्ष से - सुधा मिश्रा स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा आशाओं के दिये जलाकर,उम्मीदों के पुष्प खिलाकर्। सपनों का एक महल सजा कर,स्वागत करती नव वर्ष तुम्हारा॥ स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा॥ छोटी सी एक विनय करूं, सुनो प्रार्थना अगर मेरी तो। ये होगा उपकार तुम्हारा,स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा॥ नये वर्ष में नयी कामना, हर दिल में लहरायेगी। इच्छाओं की कुसुम ...

अभिनंदन नव वर्ष तुम्हारा – देवेन्द्र मिश्र

Thursday, December 26th, 2013
अभिनंदन नव वर्ष तुम्हारा - देवेन्द्र मिश्र   बीते बरस की बीती बाते। खट्टी मीठी हैं कुछ यादे।। बिछड़ गये कुछ मीत हमारे॥ कुछ हैं अधूरे गीत तुम्हारे॥ लेकिन ये होता रहता है। काल चक्र किसकी सुनता है॥ इसमें उलझ कर समय न खोना। कदम बढाकर चलते रहना॥ रूका, थका जो, वो ही हारा। चलें  अनवरत ध्येय हमारा॥ आशायें भविष्य की मंगल। सुख समृद्धि की सरिता कल कल्॥ नव विश्वास  ...

मौसम – लावण्या दीपक शाह

Friday, December 6th, 2013
मौसम - लावण्या दीपक शाह खिड़की खोले देख रही हूँ मौसम का आना जाना साँसों के संग संग चलता सुधियों का ताना बाना ! वे शैशव के पल वह बेफ़िक्री कुछ खेलकूद कुछ नाशुक्री हँसी गूंजती किलकारियां भी खुशियों के ऊंचे फव्वारे ! यौवन का मदमाता वसंत वो बरखा की पागल बूँदें जाड़ों की सिरहन से कॉम्पटीन यादों के डंठल पे रिसती वो शूलें ! साल एक ...

अब मुझे संसार कुछ रुचता नहीं – डॉ मृदुल कीर्ति

Tuesday, November 26th, 2013
अब मुझे संसार कुछ रुचता नहीं - डॉ मृदुल कीर्ति अब मुझे संसार कुछ रुचता नहीं, व्योम के उस पार देखूं अब भला, ले चलोगे क्या मेरे मन चंचला? मन बहुत गतिवान गीता में कहा, चाहती हूँ देखना मन की कला. तत्व ज्ञानी कोई भी बसता नहीं। अब मुझे संसार कुछ रुचता नहीं। मोक्ष की भाषा का यह संकेत है, देह धर भव-सिन्धु पर तू नाव सी, आ गया ...

सृष्टि दर्शन –लेखिका डॉ मृदुल कीर्ति

Wednesday, November 13th, 2013
सृष्टि दर्शन –लेखिका डॉ मृदुल कीर्ति पवन सा विस्तार  मन का, गगन से स्वर मांग कर, अग्नि सी ऊर्जा समेटे, अवनि का सम्मान कर, पावनी जल सी प्रवाहित, चल पडी  विश्वास है, पञ्च तत्त्वों का अधिष्ठाता बुलाता पास है. पांचभौतिक तत्व,  प्रकृति सृष्टि के प्रासार हैं, देह धारण, वृद्धि, मृत्यु प्रकृति के अभिसार है. चल रहा ब्रमांड जिसके नियम के अनुसार है. संचलित ...

भारतीय अमेरिकी को मिली धर्मात्मा की उपाधि

Saturday, November 2nd, 2013
भारतीय अमेरिकी को मिली धर्मात्मा की उपाधि न्यू जर्सी ,नवंबर ०२ : न्यूजर्सी के एक प्रख्यात भारतीय अमेरिकी हिन्दू धार्मिक नेता एस यज्ञसुब्रमण्यम को श्रंगेरी के शंकराचार्य ने धर्मात्मा की उपाधि से सम्मानित किया। यज्ञसुब्रमण्यम श्रंगेरी पीठम के 1200 साल से अधिक पुराने इतिहास में यह सम्मान पाने वाले तीसरे व्यक्ति हैं। एक विज्ञप्ति में बताया गया है ...

ग़ज़ल – प्राण शर्मा

Sunday, September 22nd, 2013
ग़ज़ल - प्राण शर्मा इक सुई की ही तरह है लापता उसकी खुशी इसलिए शायद बड़ा मायूस है अब आदमी * कब तलक जीएगा वो बेचैनियों के बीच में आदमी को चाहिए दो - चार घड़ियाँ चैन की * काश , हमदर्दी दिलों में होती कुछ न कुछ जनाब क़त्ल होता देख कर छिप जाते हैं अक्सर कई * दोस्ती हो दुश्मनी ये ...
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