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प्रख्यात साहित्यकार विजयदान देथा का निधन


vijaydan-Detha   नवम्बर 11:    राजस्थानी भाषा के प्रख्यात   साहित्यकार   विजयदान   देथा    का रविवार (नवम्बर 10) को निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे।   विजयदान ‘बिज्जी’ के नाम से और अपनी कहानियों के लिए देश-विदेश में काफी मशहूर थे।

लोक कथाओं एवं कहावतों का अद्भुत   संकलन करने वाले पद्मश्री देथा की   कर्मस्थली   उनका पैथृक गांव बोरूंदा ही रहा तथा एक छोटे से गांव में बैठकर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के साहित्य का सृजन किया। राजस्थानी लोक संस्कृति की प्रमुख संरक्षक संस्था   रूपायन संस्थान (जोधपुर) के सचिव देथा का जन्म 1 सितंबर 1926 को बोरूंदा में हुआ।

देथा की राजस्थानी में चौदह खडों में    प्रकाशित बातां रीफुलवाड़ी के दसवें खण्ड को   भारतीय राष्ट्रीय साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत किया गया,   जो राजस्थानी कृति पर पहला पुरस्कार है।    उनकी अन्य प्रकाशित कृतियों में राजस्थानी हिन्दी कहावत कोष, साहित्य और समाज, प्रेमचन्द्र के पात्र, दुविधा और अन्य कहानियां उलझन, अलेखूं हिटलर तथा रूंख प्रमुख है।

प्रारम्भ में 1953 से 1955   तक बिज्जी ने हिन्दी    मासिक प्रेरणा का सम्पादन किया।   बाद में हिन्दी त्रैमासिक रूपम, राजस्थानी शोध पत्रिका परम्परा, लोकगीत, गोरा हट जा, राजस्थान के प्रचलित प्रेमाख्यान का विवेचन, जैठवै रा सोहठा और कोमल कोठारी के साथ संयुक्त रूप से वाणी और लोक संस्कृति का सम्पादन किया।

देथा की लिखी कहानियों   पर दो   दर्जन से ज्यादा फिल्में बन चुकी हैं,   जिनमें मणि कौल द्वारा   निर्देशित दुविधा पर अनेक राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। इसके अलावा वर्ष 1986 में उनकी कथा पर प्रकाश झा द्वारा निर्देशित फिल्म परिणीति काफी प्रभावित हुई है। राजस्थान साहित्य अकादमी 1972-73 में उन्हें विशिष्ट साहित्यकार के रूप में सम्मानित कर चुकी है।

राजस्थान के  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने   साहित्यकार देथा के निधन पर   गहरा शोक व्यक्त किया है। गहलोत ने अपने संवेदना संदेश में कहा   कि देथा ने लोक एवं वाचिक परम्परा को आगे बढ़ाने के साथ ही राजस्थानी कथा साहित्य में अभूतपूर्व योगदान दिया।

उन्होंने   कहा कि   अन्तर्राष्ट्रीय स्तर    पर ख्याति प्राप्त बातां   रीफुलवारी   सहित उनकी अनेक लोकप्रिय कथाओं   में  राजस्थान की  सांस्कृतिक  विरासत जनजीवन की गहरी झलक दिखाई पड़ती है।    साहित्य जगत में बिज्जी के नाम से लोकप्रिय देथा के योगदान को सदैव याद किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके देथा से आत्मीय संबंध रहे। जोधपुर जिले के बोरूंदा गांव में रहकर भी उन्होंने विश्वकथा साहित्य   में अपनी सृजनशीलता का   अनुकरणीय परिचय दिया। गहलोत ने दिवंगत की आत्मा की शांति   तथा शोक संतृप्त परिवारजनों को यह आघात सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना  की।

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