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मत्स्य उत्सव में मछलियों ने मन मोहा


भोपाल। जल की रानी यानी मछली की दुनिया निराली है। पानी में उसकी कलाबाजी हर किसी को भरमा जाती है। तालों की नगरी भोपाल में आयोजित मत्स्य उत्सव में दुनिया भर की रंग-बिरंगी मछलियों ने दर्शकों को मुग्ध किया।

इस उत्सव में मछलियों की दुनिया से रूबरू कराने के लिए एक विशेष पंडाल बनाया गया, जिसमें तरह-तरह की मछलियों का प्रदर्शन किया गया। फिश एक्वेरियम गैलरी को एक सुरंग का रूप दिया गया। लगभग 100 फुट लम्बी और ‘यू’ आकार की इस सुरंग की दोनों दीवारों के अलावा जमीनी स्तर पर कांच का जाल बिछाया गया और उसके भीतर पानी में रंग-बिरंगी मछलियां की उछलकूद दिखाई गई।

यों तो मत्स्य उत्सव के सभी स्टॉल पर लोग पहुंचे, मगर फिश एक्वेरियम गैलरी में पहुंचने वालों की संख्या कई गुना रही।

यहां के लाल परेड ग्राउंड में चार फरवरी से चल रहे मत्स्य उत्सव के अंतिम दिन सोमवार को स्कूली बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्ग तक मछलियों की दुनिया देखने पहुंचे।

रंग-बिरंगी मछलियों को देखकर रोमांचित तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले अमन ने बताया कि उसने इस तरह की मछलियां पहले कभी नहीं देखी। उसने कहा, “मैंने तालाब में मछलियां देखी हैं और कई घरों में रखे कांच के बक्से में रखी मछलियां भी देखी हैं, लेकिन इतनी तरह की मछलियां पहले कभी नहीं देखी थी। पता नहीं ये मछलियां कहां से आई होंगी.. काश! कुछ मछलियां मुझे भी मिल जातीं।”

स्कूल की टोली के साथ आई छात्रा रश्मि खरे कहती है कि उसने मछलियों के बारे में पढ़ा है, मगर करीब से देखने का मौका कम मिला है। उसे जब पता चला कि मत्स्य महोत्सव में मछलियों का संसार सजा है तो वह भी देखने आ पहुंची। वह कहती है, “खूब मछलियां देखीं, मजा आया लेकिन सबसे बड़ी कमी यह खली कि मछलियों के बारे में बताने वाला कोई न मिला।”

मध्य प्रदेश के मत्स्य पालन विभाग की ओर से आयोजित इस उत्सव के दौरान मछुआरा पंचायत भी लगी, जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मत्स्य पालकों की समस्याएं सुनीं।

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