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ऑस्ट्रेलिया में रिश्वत के मामले में भारतीय छात्र को जेल


मेलबर्न। ऑस्ट्रेलिया में एक भारतीय छात्र को रिश्वत घोटाले मामले में शामिल होने का दोषी पाए जाने पर 14 महीने की जेल की सजा सुनाई गई है।

छात्र पर आरोप है कि उसने ऑस्ट्रेलिया का स्थायी निवास प्रमाणपत्र और वीजा पाने के लिए जरूरी अंग्रेजी की परीक्षा को पास करने के लिए जरूरी मार्क्स पाने में उसने कई लोगों की रिश्वत लेकर मदद की। पर्थ की स्थानीय अदालत ने सोमवार को राजेश कुमार को सजा सुनाई। उन पर नवंबर 2009 से जून 2010 के बीच 10 मामलों में रिश्वत देने के आरोप में मामला चला था।

अदालत ने पाया कि कुमार घोटाले में मध्यस्थ की भूमिका में थे और उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर 32,000 डॉलर (लगभग 16 लाख रुपये) से 44,000 डॉलर (लगभग 22 लाख रुपये) लिए।

इतना ही नहीं कुमार ने अपने लिए भी इंटरनैशनल इंग्लिश टेस्टिंग सिस्टम (आईईएलटीएस) के रिजल्ट्स पक्ष में करवाने के लिए रिश्वत दी थी। घूस का यह पैसा कुर्टिन यूनिवर्सिटी के एक कर्मचारी कोक केथ लो को दी गई। रिश्वत के मामले में 9 अन्य को भी दोषी ठहराया गया है। कुमार ने एक दूसरे भारतीय नागरिक प्रीतीश शाह के जरिए भुगतान करवाया था। शाह स्थानीय सर्विस स्टेशन पर काम करते हैं। शाह ने पैसे अब्दुल कादेर को दिए जो लो के साथ रहते थे। यह पैसा कुमार के लिए आईईएलटीएस परिणाम पक्ष में करवाने के लिए दिया गया था ताकि वह कामकाजी वीजा हासिल कर सके। उसके बाद कुमार ने अन्य छात्रों के लिए भी रिश्वत दी। वह हर मामले में 6,000 डॉलर (लगभग 3 लाख रुपये) लेता था।

लो पहले से जेल में हैं। रिश्वत के 15 मामलों को लेकर उन्हें दो साल की सजा हुई है। कादेर को 18 महीने और शाह को एक साल की जेल हुई है। ऑस्ट्रेलियाई आव्रजन कानून के तहत स्थायी निवास, कामकाजी या छात्र वीजा हासिल करने के लिए आईएलटीएस के तहत अंग्रेजी के चार विषयों को मिनिमम 7.0 मार्क्स से पास करने की जरूरत होती है।

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