मोल्डिंग सिस्टम — अलका सिन्हा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ नीति आयोग की पहली बैठक 6 फरवरी भारत ने किया पृथ्वी-2 मिसाइल का सफल प्रायोगिक परीक्षण व्यक्ति पूजा को अनुचित नहीं मानता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
दिव्या माथुर की कहानी : अंतिम तीन दिन अमेरिकी कोर्ट ने सोनिया गांधी से पासपोर्ट दिखाने को कहा अमेरिकी न्यायाधीश ने 1984 के दंगों पर आदेश सुरक्षित रखा यमन में डूबा जहाज, 12 भारतीय नाविक हुए लापता पंजाबी गायक शिंदा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

मई दिवस – महेंद्रभटनागर


mahender bhatnager

मानव-समता का त्योहार

जब तक

जग के कोने-कोने में न थमेगा

सामाजिक घोर विषमता का बहता ज्वार,

हर श्रमजीवी

तब तक

अविचल मुक्त मनाएगा

‘मई-दिवस’ का त्योहार !

मानव-समता का त्योहार !

.

वह मई-माह की पहली तारीख़

अठारह-सौ-छियासी सन् की,

जब अमरीका के शहरों में

मज़दूरों की टोली

विद्रोही बनकर निकली !

.

देख जिसे

थर-थर काँपी थी पूँजीवादी सरकार,

पशु बनकर मज़दूरों पर

जिसने किये दमन-प्रहार !

.

पर, बन्द न की जनता ने

अपने अधिकारों की आवाज़,

भर लेता था उर में

उठती स्वर-लहरों को आकाश !

.

वह बल था

जो धरती से जन्मा था,

वह बल था

जो संघर्षों की ज्वाला से जन्मा था,

वह बल था

जो पीड़ित इंसानों के प्राणों से जन्मा था !

.

फिर सोचो, क्या दब सकता था ?

पिस्तौल, मशीनगनों से क्या मिट सकता था ?

बढ़ता रहा निरन्तर

श्रमिकों का जत्था सीना ताने,

होठों पर थे जिसके

आज़ादी के, जीवन के प्रेरक गाने !

.

जिन गानों में

दुनिया के मूक ग़रीबों की

आहें और कराहें थीं,

जिन गानों में

दुनिया के अनगिनती मासूमों के

जीवन की चाहें थीं !

.

आहें और कराहें कब दबती है ?

जीवन की चाहें कब मिटती हैं ?

टकराया है मानव जोंकों से

और भविष्यत् में भी टकराएगा !

.

वह निश्चय ही

सद्भावों को वसुधा पर लाएगा !

वह निश्चय ही

दुनिया में समता, शान्ति, न्याय का

झंडा ऊँचा रक्खेगा !

मानव की गरिमा को जीवित रक्खेगा !

*****

drmahendra02@gmail.com

हिन्दी में राष्ट्रीय - अंतरराष्ट्रीय समाचार, लेख, भाषा - साहित्य एवं प्रवासी दुनिया से नि:शुल्क जुड़ाव के लिए
अपना ईमेल यहाँ भरें :

Leave a Reply