पंजाबी युवकों को बचाने वाले प्रवासी भारतीय एसपी सिंह ओबराय निराश
‘रोजगार की तलाश में अरब देशों में जाने वाले पंजाबियों की हालत दयनीय है। काम के लिए बुलाने वाली बहुत से कंपनियां बंद हो जाने के कारण पंजाब के युवा लेबर कैंपों में भुखमरी में जी रहे हैं। अनपढ़ होने के कारण उन्हें यह नहीं सूझ रहा कि वह करें तो करें क्या। वहां पर पंजाबियों के लिए काम कर रही संस्था ‘सरबत दा भला’ के कौंसलर उन्हें जाकर समझा रहे हैं।’
यह कहना है प्रवासी भारतीय एसपी सिंह ओबराय का, जो सोमवार को यहां टीचर्ज होम में एक समागम में शामिल होने आए थे। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वहां पूरे देश के युवाओं खासकर पंजाबियों की हालत काफी नाजुक है। उनकी संस्था ने ऐसे युवकों के लिए ‘मोदीखाना’ बनाया है, जिसमें पंद्रह दिनों तक एक व्यक्ति को खाना दिया जाता है। अगर उसके लिए काम मिलता है तो ठीक नहीं तो उन्हें वापस स्वदेश लौटा दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि 11 आपराधिक मामलों में फंसे 61 युवकों को वहां की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिसकी बल्ड मनी भर वह उन्हें रिहा करवा चुके हैं। इनमें से 27 अपने घर लौट चुके हैं, जबकि बाकी एक दो दिन में वापस लौट आएंगे।
उन्होंने कहा कि युवक काम नहीं मिलने के बाद वहां पर अवैध धंधे करते हैं, जिस कारण वह किसी न किसी मामले में फंस जाते हैं। उनकी संस्था ऐसे युवाओं की रिहाई के लिए काम कर रही है।
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नए मामले की जानकारी नहीं
हाल ही में सामने आए पंजाबियों के नए मामले में फंसे होने के बारे में उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्हें मीडिया की खबरों से ही पता चला है। अभी तक वहां पर ऐसी कोई बात बाहर नहीं आई है। उन्होंने वहां की इंडियन एम्बेसी से इसकी जानकारी मांगी है जिसके आते ही वह उन्हें बचाने का प्रयास करेंगे। बता दें कि बठिंडा के गांव अलीके निवासी अमनदीप सिंह समेत करीब डेढ़ दर्जन युवक दुबई में एक नए हत्या मामले में फंसे हुए हैं।



















