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पी-थ्री थ्योरी से उप्र में ऊर्जा क्षेत्र का होगा बंटाधार’


Akhilesh yadavलखनऊ , 17 अप्रैल। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को लिखित पत्र भेजकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि पी-थ्री की थ्योरी के जरिए बिजली उद्योग के निजीकरण की कोशिश न तो प्रदेश हित में है और न ही ऊर्जा निगमों के हित में।  संगठन ने कहा कि गाजियाबाद, कानपुर, मेरठ, वाराणसी जैसे शहरों में बिजली वितरण व्यवस्था का पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशीप (पी-थ्री) के जरिए निजीकरण की कोशिश से प्रदेश की बिजली संकट में और इजाफा होगा, वहीं ऊर्जा निगमों के करोड़ों के घाटे में वृद्धि होगी। पी थ्री की थ्योरी को अंजाम देने के लिए तकनीकी सलाहकार की नियुक्ति के फैसले के लिए आमंत्रित की गई निविदा अनुचित है।

संघर्ष श्रमिक ने अपना तर्क मजबूत रखते हुए कहा है कि सरकार के इसी तरह के फैसले से आगरा में विफलता हाथ लगी थी। इसके बावजूद सरकार सबक सीखने के बजाय उसी रास्ते पर बढ़ रही है। राजस्व वसूली बढ़ाने, बिजली चोरी रोकने, बिजली आपूर्ति सुधारकर प्रदेश के बिजली व ऊर्जा निगमों में सुधार लाया जा सकता है। सरकार अपने फैसले को वापस ले अन्यथा पूरे प्रदेश में बड़े आंदोलन किए जाएंगे।

विद्युत वितरण व्यवस्था को निजी क्षेत्र में देने के निर्णय के विरोध में संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक ई. शैलेंद्र दुबे ने कहा है कि इस निर्णय का बिजली कर्मी पूर जोर विरोध करेंगे। संगठन के नेताओं का कहना है कि निजी हाथों में विभाग की कमान देने से असंतोष का माहौल व्याप्त होगा, साथ ही कर्मियों का उत्पीड़न बढ़ जाएगा। सरकारी संपत्ति को निजी हाथों में देना जनहित में नहीं है।

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