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कविता – आदत रही है – डॉ वेद व्यथित


Dr. Ved Vyathit

जीत का डंका बजाने की यहाँ आदत रही है

सांच कुछ भी हो छुपाने की  यहाँ आदत रही है

देखते कब हैं स्वयं की खोल कर आँखें कभी

जो किसी ने कह दिया बस ‘ हाँ जी हाँ ‘ आदत रही है।।

सर्दियों की धूप अक्सर देर से आती रही है

और दिन के डूबने से पूर्व ही जाती रही है

क्योंकि वह भी स्त्री है उसे भी अधिकार है

देश के माहौल में हो घिनौनी हरकत रहीं हैं।।।

दूसरों को खूब भाषण हम सुनते ही रहे हैं

पाठ आदर्शों के सब को हम पढते ही रहे हैं

 पर स्वयं आदर्श कितने मानते हैं हम यहाँ

प्रश्न जब ये किया जाता मौन ही बस हम रहे हैं।।

दूसरों की जय के नारे हम लगते ही रहे हैं

 लाभ जिस से हो वही  हम खूब दोहराते रहे हैं

देश या सब स्वत्व अपना जाये बेशक भाड़ में

हम तो अपने लाभ की  बस बात दोहराते रहे हैं।।

समंदर की लहर सी जो भीड़ बढ़ती आ रही है

 भीड़ केवल भीड़ है संवेदना उस में नही है

दूसरा उस को पशु सा  हांक देता है जिधर

उधर ही मुंह उठा चलना और कुछ उस में नही है।.

दूसरे हों नियंता , ये नही स्वीकार हम को

वे लिखें किसमत हमारी ये नही स्वीकार हम को

पर हमारे चाहने से कब हुआ कुछ भी यहाँ पर

मगर फिर भी कह सकें कुछ ये मिले अधिकार हम को।.

झूठ कितने ही सुबह से शाम तक हम झेलते हैं

और उन को मान कर सच जिंदगी सा ठेलते हैं

पर करें क्या सब पता हो कर भी हम लाचार हैं

सच कहने और सुनने के बहुत झेलते हैं। ।

*****

 dr.vedvyathit@gmail.com

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4 Comments

  • Devi nangrani says:

    सर्दियों की धूप अक्सर देर से आती रही है

    और दिन के डूबने से पूर्व ही जाती रही है
    Bahut hi sunder abhivyakti. Jamari bebasi ki tasveer.
    Devi Nangrani

  • om sapra says:

    bhai ved vyaathit ji
    namasty
    aap ki kavita ” AADAT RAHI HAI” KAFI SUNDER LAGI-
    KHASTOR PAR YEH PANKTIYAN ULLEKHNIYA HAIN–

    समंदर की लहर सी जो भीड़ बढ़ती आ रही है

    भीड़ केवल भीड़ है संवेदना उस में नही है

    दूसरा उस को पशु सा हांक देता है जिधर

    उधर ही मुंह उठा चलना और कुछ उस में नही है।.

    AAPKE NIRANTAR SAHITYA SEWA KE
    LIYE SHUBHKAMNAYON KE SATH-
    -OM SAPRA,
    DLEHI-9
    M -9818180932

  • sunita yadav says:

    Mahoday ,
    bahut badhiya kavita hai par ant mein itani laachari kyon ?

    BAHUT HO GAI LACHARI / AB HAMEIN KUCHH KARANA HOGA / TUFANON MEIN BHI HAMEIN DEEPAK KI TARAH JALNA HOGA /
    DOOR HOGA ANDHAKAAR \ BHID CHHANT HI JAYEGI / SAMVEDANA KI LAHAR USMEIN AAP HI AA JAYEGI /
    AADMI KA AADMI SE JAB HOGA SAAMNA/ PASHUTA KI PANK PHIR AAP HI MIT JAYEGI .

    LIKHATE RAHIYEGA .ACHHI KAVITAYEN BAHUT KAM MILTI HAIN

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