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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ


1Save daughter, daughter, teachनई दिल्ली : अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत पहुंचने से ठीक पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चौथे और संभवत: सबसे महत्वपूर्ण सुधार का शुभारंभ किया। उन्होंने भारत की बेटियों को बचाने का अभियान चलाया है। बराक ओबामा भी दो बेटियों के पिता हैं, इसलिए उन्होंने खुद को इससे जोड़ा होगा। दुनिया के कई नेता अपनी महिला आबादी में छिपी संभावनाओं को भुनाने की कोशिश में हैं, क्योंकि वैश्विक मंदी के इस दौर में उनकी अर्थव्यवस्थाओं को पुनर्जीवित करने का यह कारगर तरीका है। भारत को इसकी तत्काल आवश्यकता हो सकती है। यह देश एक घृणित काम को जड़ से मिटाने के प्रयास में है, जो कई देशों में अब भी एक सामान्य घटना है। यह घिनौनी करतूत है: गर्भवती स्त्रियों के पेट में पल रहे बच्चे की लिंग जांच करवाना और यदि वह बच्ची है, तो उसका गर्भपात करा देना। चूंकि पेट में पल रहे बच्चों को जांचने की तकनीक काफी विकसित हुई है, इसलिए 2011 के एक ब्रिटिश अध्ययन से यह पता चला है कि भारत एक करोड़, 20 लाख लड़कियों को खो चुका है और इससे पुरुष-स्त्री लिंगानुपात में काफी विषमता आई है। इससे सामाजिक संतुलन बिगड़ता है, जैसे पुरुषों को जीवनसाथी तलाशने में दिक्कतें आती हैं। साल 1971 में प्रति 1,000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या 964 थी, जो 2011 तक 918 हो गई। कुछ क्षेत्रों में तो यह संख्या 837 तक जा पहुंची है। इन सबके पीछे यह सोच है कि बेटा ही परिवार के नाम को आगे ले जाएगा, साथ ही भारत में दहेज-प्रथा भी एक वजह है। वहां कन्या पक्ष को आज भी सोना, पैसे व जायदाद देने के लिए मजबूर होना पड़ता है, शादी के समय या इससे पहले या बाद में। भारत में अनुमानत: 2,000 लड़कियां हर रोज मारी जाती हैं, या तो गर्भपात द्वारा या फिर जन्म के बाद। नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर हम जन्म लेने से पहले ही अपनी बेटियों को मार देते हैं, तो हम 21वीं सदी के नागरिक कहलाने लायक नहीं हैं, हम मानसिकता से 18वीं के नागरिक हैं, जब जन्म लेने के तुरंत बाद उनकी हत्या कर दी जाती थी। उनका नया अभियान है- ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।’ द क्रिश्चियन साइंस मॉनिटर, अमेरिका

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