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अमेरिका में हिंदी की विशेष उपलब्धियाँ


भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद और प्रवासी दुनिया के तत्वावधान में अक्षरम् द्वारा ‘हिंदी का वैश्विक परिप्रेक्ष्य’ विषय पर विचार गोष्टी एवं ब्रिटेन, नेपाल एवं सूरीनाम जा रहे हिंदी एवं सांस्कृतिक अधिकारियों का विदाई कार्यक्रम का आयोजन दिनांक 18 फरवरी, शनिवार को सायं 5 : 30 बजे संगोष्ठी कक्ष,  आजाद भवन,  आई.सी.सी.आर,  आई.टी.ओ,  दिल्ली में किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार श्री राहुल देव जी ने की तथा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के महानिदेशक श्री सुरेश गोयल जी ने  मुख्य अतिथि के तौर पर संगोष्ठी को संबोधित किया । कार्यक्रम में अमेरिका से पधारे प्रो. सुरेन्द्र गंभीर ने अमेरिका में हिन्दी भाषा की स्थिति से अतिथियों को अवगत कराया। उजबेकिस्तान की हिन्दी अध्यापिका प्रो. गुलेरिया और अमेरिका की हिन्दी साहित्यकार डॉ. अनिता कपूर ने भी सभा को सम्बोधित किया।

कार्यक्रम के शुरुआत में लंदन जा रहे हिन्दी और संस्कृति अधिकारी श्री विनोद कुमार, नेपाल जा रहे श्री मोहन चंद्र बहुगुणा और सूरीनाम जा रहे श्री अमरजीत सिंह का श्री सुरेश गोयल के द्वारा अभिनंदन किया गया। अधिकारियों ने समग्र रूप से विदेशों में हिंदी भाषा और संस्कृति के प्रचार में योगदान के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई ।
 
कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि के तौर पर पधारे आई.सी.सी.आर के महानिदेशक श्री. सुरेश गोयल जी ने कहा कि आज की संस्कृति के आधार पर हीं भाषा का प्रचार एवं प्रसार किया जाना चाहिए क्योंकि भाषा और संस्कृति को अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया की बॉलीवूड ने हिन्दी के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में हम हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार संस्कृत वाली हिन्दी के साथ नहीं कर सकते इसके लिए हमें आम तौर पर बोलचाल वाली हिन्दी के साथ शुरुआत करनी होगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर देकर कहा कि हिन्दी में जितना काम देश के बाहर हो रहा है उतना काम देश में भी नहीं हो रहा है।
 
अमेरिका से आये प्रो. सुरेन्द्र गंभीर ने पावर-प्वाईंट प्रस्तुति से अपनी बात अतिथियों के समक्ष रखी और अपने विश्लेष्णात्मक संबोधन से अमेरिका में हिन्दी की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत में हिन्दी भाषा की संवैधानिक आवश्यकता है पर प्रवासी समुदाय में हिन्दी भाषा लोगों की अस्मिता से जुड़ा है और परिवार से अपने लगाव को अभिव्यक्त करने की भाषा हिन्दी हीं है। उन्होंने इस बात पर चिंता जाहिर की कि विदेशों में हिन्दी भाषा दूसरी पीढ़ी में ना पहुंच पाने के कारण खतरे में है। उन्होंने अमेरिका में हिन्दी शिक्षा की वर्तमान स्थिति से अतिथियों को अवगत कराया। उन्होंने उपलभ्दियों का उल्लेख करते हुए बताया कि अमेरिका में अथक प्रयासों से वार्टन बिज़नेस स्कूल में और कुछ प्रमुख स्थानीय स्कूलों में भी हिंदी का अध्यापन प्रारंभ हो चूका हैं तथा अमेरिकी सरकार ने हिंदी भाषा को प्रमुख विदेशी भाषा मानकर
अपने स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए योजना बना चुकी है ।
 
 
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रसिद्ध पत्रकार श्री राहुल देव जी ने कहा कि हमें उस वर्ग से संवाद के पुल स्थापित करने की जरुरत है जो हिन्दी भाषा से दूर जा रही है। उन्होंने सरकारी हिन्दी संस्थाओं की जिम्मेदारियों और उनकी उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला। श्री राहुल देव जी ने हिन्दी और संस्कृति अधिकारियों को शुभकामना दी और कहा कि आप वहां की संस्कृति को भली-भांती समझे ताकि संबंधों में प्रगाढ़ता लायी जा सके।
 
कार्यक्रम में उजबेकिस्तान से पधारी हिन्दी की प्रोफेसर गुलेरिया ने कहा कि उनके देश में हिन्दी के प्रति प्यार है। उन्होंने उजबेकिस्तान में हिन्दी भाषा में हो रहे शोध-प्रबन्धों के विषय में भी चर्चा की। उन्होंने भी इस बात को स्वीकारा की उजबेकिस्तान में भी हिन्दी के प्रचार-प्रसार में बॉलीवुड की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रसिद्ध साहित्यकार विष्णु प्रभाकर पर अपनी पी.एच.डी करने वाली प्रो. गुलेरिया ने कहा कि भारतीय भाषाओं में पुस्तकों की कमी होने का बावजूद भी हिन्दी के प्रति प्यार में कोई कमी नहीं आयी है।अमेरिका से आयी हिन्दी साहित्यकार डॉ. अनिता कपूर ने कहा कि अमेरिका में हिन्दी को व्यापक स्वीकृति मिल रही है। हिन्दी भाषा का अध्यापन विदेशों में बढ़ रहा है।  उन्होंने अमेरिका से प्रकाशित हिन्दी की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं की भी चर्चा की।
कार्यक्रम में प्रमुख हिंदी साहित्यकारों एवं हिंदी सेवियों ने भाग लिया, जिसमे डॉ. हरीश नवल, कमल किशोर गोयनका, दिल्ली आकाशवाणी के प्रमुख डॉ. लक्ष्मी शंकर वाजपेई, नरेश शांडिल्य, डॉ. विमलेश कांति वर्मा, अलका सिन्हा, डाइमंड बुक्स के नरेन्द्र वर्मा तथा प्रवासी दुनिया कि प्रबंध संपादिका सरोज शर्मा, हिंदी बुक सेंटर के अनिल वर्मा प्रमुख नाम हैं।
 
कार्यक्रम के शुरुआत में अक्षरम के अध्यक्ष और हिन्दी साहित्यकार श्री अनिल जोशी ने अतिथियों का परिचय करवाया और हिन्दी की तात्कालिन स्थिति पर एक संक्षिप्त टिप्पणी के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि देश और विदेश में हिंदी भाषा का नेतृत्व करने वालें, हिंदी विचारकों और हिंदी सेवियों को एक सूत्र में लाने की योजना बनाई जा रही हैं ।
अंत में श्री नारायण कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन दिया और वक्ताओं को बेझिझक अपनी बात रखने के लिए तथा हिन्दी प्रेमियों को सचेत करने के लिए प्रशंसा की।

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