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Posts Tagged ‘जयशंकर प्रसाद’


खँडहर की लिपि -जयशंकर प्रसाद

Thursday, January 30th, 2014
खँडहर की लिपि -जयशंकर प्रसाद जब बसन्त की पहली लहर अपना पीला रंग सीमा के खेतों पर चढ़ा लायी, काली कोयल ने उसे बरजना आरम्भ किया और भौंरे गुनगुना कर काना-फूँसी करने लगे, उसी समय एक समाधि के पास लगे हुए गुलाब ने मुँह खोलने का उपक्रम किया। किन्तु किसी युवक के चञ्चल हाथ ने ...

जयशंकर प्रसाद की लघुकथाओं पर चर्चा

Thursday, January 30th, 2014
जयशंकर प्रसाद की लघुकथाओं पर चर्चा महाकवि के रूप में सुविख्यात जयशंकर प्रसाद  (१८८९-१९३७)  हिंदी नाट्य जगत और कथा साहित्य में एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। तितली, कंकाल और इरावती जैसे उपन्यास और आकाशदीप, मधुआ और पुरस्कार जैसी कहानियाँ उनके गद्य लेखन की अपूर्व ऊँचाइयाँ हैं। जीवन परिचय इनका जन्म ३० जनवरी १८८९  को वाराणसी में हुआ। स्कूली शिक्षा ...

जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय

Friday, November 15th, 2013
जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय जयशंकर प्रसाद जीवन परिचय :- जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी, 1889  ई० में वाराणसी (उ० प्र०) में पिता श्री देवी प्रसाद साहू के घर में हुआ था जो एक अत्यन्त समृद्ध व्यवसायी थे। प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही प्रारम्भ हुई तथा संस्कृत, हिन्दी, फारसी तथा उर्दू के लिए अलग-अलग शिक्षक नियुक्त ...

उस पार का योगी -जयशंकर प्रसाद

Sunday, March 31st, 2013
उस पार का योगी -जयशंकर प्रसाद सामने सन्ध्या-धूसरति जल की एक चादर बिछी है। उसके बाद बालू की बेला है, उसमें अठखेलियाँ करके लहरों ने सीढ़ी बना दी है। कौतुक यह है कि उस पर भी हरी-हरी दूब जम गयी है। उस बालू की सीढ़ी की ऊपरी तह पर जाने कब से एक शिला पड़ी है। ...

स्वर्ग के खंडहर में -जयशंकर प्रसाद

Wednesday, January 30th, 2013
स्वर्ग के खंडहर में -जयशंकर प्रसाद वन्य कुसुमों की झालरें सुख शीतल पवन से विकम्पित होकर चारों ओर झूल रही थीं। छोटे-छोटे झरनों की कुल्याएँ कतराती हुई बह रही थीं। लता-वितानों से ढँकी हुई प्राकृतिक गुफाएँ शिल्प-रचना-पूर्ण सुन्दर प्रकोष्ठ बनातीं, जिनमें पागल कर देनेवाली सुगन्ध की लहरें नृत्य करती थीं। स्थान-स्थान पर कुञ्जों और पुष्प-शय्याओं का ...

जयशंकर प्रसाद-‘कामायनी’

Tuesday, January 29th, 2013
जयशंकर प्रसाद-'कामायनी' 'कामायनी' जयशंकर प्रसाद की और सम्भवत: छायावाद युग की सर्वश्रेष्ठ कृति मानी जाती है। प्रौढ़ता के बिन्दु पर पहुँचे हुए कवि की यह अन्यतम रचना है। इसे प्रसाद के सम्पूर्ण चिंतन- मनन का प्रतिफलन कहना अधिक उचित होगा।कामायनी हिन्दी साहित्य के  महाकाव्य के रूप में जानी जाती  है। इस महाकाव्य ...

कामायनी: जयशंकर प्रसाद

Tuesday, January 29th, 2013
कामायनी: जयशंकर प्रसाद कामायनी   हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छाँह एक पुरुष, भीगे नयनों से देख रहा था प्रलय प्रवाह   नीचे जल था ऊपर हिम था, एक तरल था एक सघन, एक तत्व की ही प्रधानता कहो उसे जड़ या चेतन दूर दूर तक विस्तृत था हिम स्तब्ध उसी के हृदय समान, नीरवता-सी शिला-चरण से टकराता फिरता पवमान तरूण तपस्वी-सा वह बैठा साधन ...

कविता : जयशंकर प्रसाद

Tuesday, January 29th, 2013
कविता : जयशंकर प्रसाद जीवन परिचय -जयशंकर प्रसाद का जन्म30 जनवरी, 1889 ई० में वाराणसी (उ० प्र०) में पिता श्री देवी प्रसाद साहू के घर में हुआ था जो एक अत्यन्त समृद्ध व्यवसायी थे। प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही प्रारम्भ हुई . काव्य-चित्राधार, कानन कुसुम, प्रेम-पथिक, महाराणा का महत्व, झरना, करुणालय, आंसू, लहर एवं कामायनी। नाटक- सज्जन, ...

हिन्दी भाषा की उन्नति का सोपान : विदेशी पृष्ठभूमि

Wednesday, July 20th, 2011
हिन्दी भाषा की उन्नति का सोपान : विदेशी पृष्ठभूमि -प्रेषक---प्रीत अरोड़ालेखक परिचय- प्रीत अरोड़ा जन्म - २७ जनवरी १९८५ को मोहाली पंजाब में।शिक्षा- एम.ए. हिंदी पंजाब विश्वविद्यालय से हिंदी में दोनो वर्षों में प्रथम स्थान के साथ।कार्यक्षेत्र- अध्ययन एवं स्वतंत्र लेखन व अनुवाद। अनेक प्रतियोगिताओं में सफलता, आकाशवाणी व दूरदर्शन के कार्यक्रमों तथा साहित्य उत्सवों में भागीदारी, हिंदी से ...

हिन्दी सेवी आचार्य शिवपूजन सहाय की रचनावली दस खण्डों में प्रकाशित

Thursday, January 20th, 2011
हिन्दी सेवी आचार्य शिवपूजन सहाय की रचनावली दस खण्डों में प्रकाशित राष्ट्रीय आंदोलन के प्रखर पत्रकार संपादक एवं हिन्दी सेवी पद्मभूषण आचार्य शिवपूजन सहाय की रचनावली दस खण्डों में प्रकाशित हुई है जिसका लोकार्पण 24 जनवरी को प्रख्यात आलोचक डा॰ नामवर सिंह करेंगे। 9 अगस्त 1893 को बिहार के बक्सर जिले मे उनवाँस गाँव में जन्मे श्री सहाय की इस रचनावली में ...