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Posts Tagged ‘मृदुल कीर्ति’


आध्यात्मिक कविताएं- मृदुल कीर्ति

Friday, October 2nd, 2015
आध्यात्मिक कविताएं- मृदुल कीर्ति (अाध्यात्मिक जीवन के सत्यों , विचार बिदुओं को काव्य संवेदना में पिरो कर विचारों की ऋंखला बनाते हुए कविताओं की रचना डा मृदुल कीर्ति की एक प्रमुख विशेषता है। उनकी मुक्त छंद की कविताएं भी श्लोक या मंत्र की तरह हैं जो किसी न किसी आध्यात्मि्क सत्य का आविष्कार करती ...

दीपावली पर करें मन की भी सफाई – डॉ मृदुल कीर्ति

Friday, November 1st, 2013
दीपावली पर करें मन की भी सफाई - डॉ मृदुल कीर्ति सुखद  यात्रा 'समान कम रखिये , यात्रा सुखद रहेगी . रेलवे स्टेशन पर जगह-जगह लिखा होता है कि 'समान कम रखिये, यात्रा सुखद रहेगी'.. मुझे खूब याद है सन १९९९ में जब पहली बार अमेरिका आई थी तो साठ -साठ किलो की दो अटैचियाँ ले जा सकते थे आज केवल २० किलो ...

कनक-कनक ,सोना-सोना, हाय सोना-हाय सोना- डा मृदुल कीर्ति

Sunday, July 14th, 2013
कनक-कनक ,सोना-सोना, हाय सोना-हाय सोना- डा मृदुल कीर्ति  द्वापर युग का अवसान है, काल विभाजन की नियमावली के अनुसार  कलयुग का आगमन हैं  --कलयुग स्वयं को स्थापित करने के लिए स्थान की खोज में है. सबने स्थान देने से मना किया तो राजा परीक्षित से कलियुग ने बहुत  आग्रह से स्थान माँगा,  अनेकों तर्क और आग्रह से राजा ...

अनुराग शर्मा नाद के कहानीकार हैं -डॉ मृदुल कीर्ति

Saturday, January 12th, 2013
 अनुराग शर्मा  नाद के कहानीकार हैं -डॉ मृदुल कीर्ति पञ्च तत्वों के समीकरण की जब बात होती है तो उनकी तन्मात्राओं के  अनुपात से ही उनकी सूक्ष्मता को जान पाते हैं. आकाश तत्व की केवल 'नाद' तन्मात्रा है. नाद का सीधा सम्बन्ध श्रुति से है.  वैसे भी हम श्रुति परंपरा के ही तो वाहक हैं क्योंकि वेद श्रुति से ...

ईशावास्य उपनिषद – डॉ मृदुल कीर्ति

Wednesday, July 4th, 2012
ईशावास्य उपनिषद - डॉ मृदुल  कीर्ति यस्तु सर्वाणि भूतान्यात्मनेवानुपश्यति। सर्वभूतेषु चात्मानं ततो न विजुगुप्सते ॥ प्रतिबिम्ब जो परमात्मा का प्राणियों में कर सके, फिर वह घृणा संसार में कैसे किसी से कर सके। सर्वत्र दर्शन परम प्रभु का, फिर सहज संभाव्य है, अथ स्नेह पथ से परम प्रभु, प्रति प्राणी में प्राप्तव्य है॥ *****

कविता कोश के लिए मैंने अपने करियर को भी दांव पर लगाय़ा – – लालित्य ललित

Saturday, June 30th, 2012
कविता कोश के लिए मैंने अपने करियर को भी दांव पर लगाय़ा - - लालित्य ललित                                                                                                     ...

आज का मंत्र ईशावास्य उपनिषद से -भावानुवाद – डॉ मृदुल कीर्ति

Sunday, June 3rd, 2012
आज का मंत्र ईशावास्य उपनिषद से -भावानुवाद - डॉ मृदुल कीर्ति ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम पूर्णात पूर्ण मुदच्यते, पूर्णस्य पूर्ण मादाय , पूर्ण मेवा वशिष्यते.   परिपूर्ण पूर्ण है पूर्ण प्रभु ,  यह जगत भी प्रभु पूर्ण है, परिपूर्ण प्रभु की पूर्णता से,      पूर्ण जग सम्पूर्ण है. उस पूर्णता से पूर्ण घट कर,    पूर्णता ही शेष है , परिपूर्ण प्रभु परमेश की , यह पूर्णता ...

संस्कृतिकर्मी व लेखिका डॉ मृदुल कीर्ति के जन्मदिन 7 अक्तूबर के अवसर पर उनकी रचनाएं व साक्षात्कार

Thursday, October 6th, 2011
संस्कृतिकर्मी व लेखिका डॉ मृदुल कीर्ति के जन्मदिन 7 अक्तूबर के अवसर पर उनकी रचनाएं व साक्षात्कार भारतीय वाड्मय के काव्यानुवाद का जो कार्य डॉ.  मृदुल कीर्ति ने किया है वह अद्भुत है। भारतीय वाड्मय के ज्ञान के महासागर से अमर सूत्रों को हिंदी काव्य की सरिता में पिरोना बड़ी चुनौती थी । इन्हो्ने उसे ही जीवन  का ध्येय बना लिया । जिस अनुवाद को ही करना ...