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मोल्डिंग सिस्टम — अलका सिन्हा

Sunday, October 4th, 2015
मोल्डिंग सिस्टम  -- अलका सिन्हा रंजन का फोन आया था। खुशी से चहकते हुए उसने बताया कि वह थाइलैंड गया था और ताइक्वांडो में उसने थाइलैंड को हराकर सिल्वर मेडल जीता था। “गोल्ड क्यों नहीं?” मीठे उलाहने से मैंने पूछा था। “ये तो पहला मौका था भाभी, दिसंबर में चीन के साथ मैच है, तब गोल्ड मारूंगा।” ...

मुझसे कैसा नेह – अलका सिन्हा

Thursday, October 1st, 2015
मुझसे कैसा नेह - अलका सिन्हा   गुड्डो का स्कूल ......................... ”बीबी जी, लगता है बिटिया का पेट दुखता है! लाओ, सरसों की बाती बनाकर सेक दें।“ कई बार आंखें मटकाती रामबाण औषधि बताती, ”छाती का दो बूंद दूध बिटिया की नाभि पर टपका दो, बुखार तुरंत उतर जाएगा...।“ और सचमुच ऐसा ही होता। मैंने उसका सारा ...

अलका सिन्हा एवं मनोज सिन्हा को सहचर सम्मान

Wednesday, March 26th, 2014
अलका सिन्हा एवं मनोज सिन्हा को सहचर सम्मान   परिचय   साहित्य परिषद के 27 वें वार्षिक  उत्सव के  अवसर पर राजधानी के रूसी विज्ञान एवं संस्कृति केंद्र में18 मार्च,  2014 को होली की खुमारी में  रची-बसी वह  शाम तब यादगार बन गयी जब भाषाविद्, हिंदी सेवी,   भारत सरकार के संस्कृति  मंत्रालय में सहायक निदेशक के रूप में ...

अबकी ऐसे फाग मनाएं – अलका सिन्हा

Monday, March 17th, 2014
अबकी ऐसे फाग मनाएं - अलका सिन्हा अबकी ऐसे फाग मनाएं, दीवारों पर रंग लगाएं।  रंग भरी भीगी दीवारें, महक उठें सोंधी दीवारें, नरम पड़ी गीले रंगों से, जहां-तहां टूटें दीवारें, मृदुल-प्रेम के भाव जगाएं। बरसे अबकी इतना रंग, बह जाएं गलियारे तंग, दीवारों से राह बने, आने का हो आमंत्रण, मिलकर सब जोगीरा गाएं। दीवारें घर के भीतर की, दीवारें मंदिर-मस्जिद की, ऊंची-नीची सब ...

मेरे बारे में सारा जहान जाने, ये कोई जरूरी तो नहीं – राजी सेठ

Saturday, August 17th, 2013
मेरे बारे में सारा जहान जाने, ये कोई जरूरी तो नहीं - राजी सेठ अलका सिन्हा वर्तमान पाकिस्तान के नौशेहरा छावनी नामक स्थान में सन् 1935 में जन्म लेने वाली राजी सेठ ने अंग्रेजी साहित्य से एम.ए. करने के उपरान्त तुलनात्मक धर्म और भारतीय दर्शन में विशेष अध्ययन किया। इनकी कृतियों में ‘निष्कवच’ और ‘तत-सम’ उपन्यास तथा ‘अन्धे मोड़ से आगे’, ‘तीसरी हथेली’, ‘यात्रा मुक्त’, ...

खुशबू बनकर लौटेंगे – अलका सिन्हा

Sunday, June 9th, 2013
खुशबू बनकर लौटेंगे - अलका सिन्हा  (हिंदी के वरिष्ठ लेखक, चिंतक, विचारक देवेन्द्र इस्सर का जाना हमारे लिए मह्त्वपूर्ण क्षति थी । वे एक बड़े कद के लेखक थे। इस अर्थ में बड़े नहीं कि उन्हें बहुत पुरस्कार मिले हों या बड़े पदों या संस्थाओ में रहे हों । वे इसलिए बड़े लेखक थे कि उनका ...

रूहानी रात और उसके बाद – अलका सिन्हा

Monday, May 27th, 2013
रूहानी रात और उसके बाद -   अलका सिन्हा   बात चार साल पुरानी है, मगर मन की किताब पर उसका हर्फ-हर्फ ताजा है। ये दिन बेहद व्यस्तताओं से भरे थे। हर रोज जिंदगी की किताब नए किरदारों से रू-ब-रू करा रही थी।  कुछ नाम, कुछ डीटेल्स मैं लगातार अपनी डायरी में लिखती जाती थी क्योंकि हर दिन दर्ज ...

अंतर्राष्ट्रीय हिंदी उत्सव में वरिष्ठ उड़िया लेखिका पद्मश्री श्रीमती प्रतिभा राय से संवाद 9 फरवरी को

Friday, March 1st, 2013
 पद्मश्री श्रीमती प्रतिभा राय और  कवयित्री-कथाकार श्रीमती अलका सिन्हा 11वें अंतरराष्ट्रीय हिंदी उत्सव में ‘लेखक से संवाद’ श्रृंखला के अंतर्गत ज्ञानपीठ का 47वां सम्मान प्राप्त करने वाली वरिष्ठ उड़िया लेखिका पद्मश्री श्रीमती प्रतिभा राय से एक अंतरंग मुलाकात की गई जो कि इस उत्सव की विशेष उपलब्धि रही। बात-चीत कर रही थीं ...

प्रभाव के प्रसार में थरथरा देती है अलका सिन्हा की कहानी- राजी सेठ

Wednesday, September 5th, 2012
प्रभाव के प्रसार में थरथरा देती है अलका सिन्हा की कहानी- राजी सेठ   राजधानी के हिन्दी भवन में अलका सिन्हा के कहानी - संग्रह ‘मुझसे कैसा नेह’ का लोकार्पण किताबघर प्रकाशन एवं अक्षरम् के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मूर्धन्य आलोचक प्रभाकर श्रोत्रिय ने भाषा की सघनता को कीमती बताते हुए अलका की ‘चौराहा’ और ‘मोल्डिंग सिस्टम’ ...

अलका सिन्हा के कहानी-संग्रह ‘मुझसे कैसा नेह’ का लोकार्पण

Thursday, August 30th, 2012
अलका सिन्हा के कहानी-संग्रह 'मुझसे कैसा नेह' का लोकार्पण   संकल्प जोशी द्वारा संग्रह की कहानी  ‘चौराहा’  पर एकल अभिनय ( राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के साथ दो बार थियेटर वर्कशाप कर चुके संकल्प जोशी शिवाजी कालेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थी हैं। प्रथम वर्ष के विद्यार्थी के रूप में संकल्प जोशी ने भारत की न्याय व्यवस्था पर चर्चित नाटक सत्यमेव जयते ...
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