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दिव्या माथुर की कहानी : अंतिम तीन दिन अमेरिकी कोर्ट ने सोनिया गांधी से पासपोर्ट दिखाने को कहा अमेरिकी न्यायाधीश ने 1984 के दंगों पर आदेश सुरक्षित रखा यमन में डूबा जहाज, 12 भारतीय नाविक हुए लापता पंजाबी गायक शिंदा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

Posts Tagged ‘hindi poet’


गोपालदास ‘नीरज’- जन्म दिवस

Friday, January 2nd, 2015
गोपालदास 'नीरज'- जन्म दिवस गोपालदास सक्सैना 'नीरज' (जन्म- 4 जनवरी, 1925, पुरावली, इटावा, उत्तरप्रदेश) वर्तमान समय में सर्वाधिक लोकप्रिय और प्रसिद्ध कवि हैं, जिन्होंने अपनी मर्मस्पर्शी काव्यानुभूति तथा सरल भाषा द्वारा हिन्दी कविता को एक नया मोड़ दिया है और बच्चन जी के बाद नयी पीढी को सर्वाधिक प्रभावित किया है। नीरज जी से ...

उर्वशी-रामधारी सिंह ‘दिनकर’

Sunday, September 22nd, 2013
उर्वशी-रामधारी सिंह ‘दिनकर’             'एक मूर्ति में सिमट गर्इं किस भांति सिध्दियां सारी? कब था ज्ञात मुझे इतनी सुंदर होती है नारी? लाल लाल वे चरण कमल-से, कुंकुम-से, जावक-से, तन की रक्तिम कांति युध्द, ज्यों, धुली हुई पावक से। जग भर की माधुरी अरुण अधरों में धरी हुई-सी, आंखों में वारुणी रंग निद्रा कुछ भरी हुई सी। तन-प्रकांति मुकुलित अनंत ...

दोहे – कुसुम वीर

Sunday, July 28th, 2013
दोहे  - कुसुम वीर जीवन के  दिन चार हैं, कहते चतुर सुजान। व्यर्थ गवाँ मत ज़िन्दगी, पल-पल कीमत जान।। .  सपने तो हैं बुलबुले, दिखते ही छिप जाएं संघर्षों की ज़िन्दगी, पर तू मत घबराए . सपने मानो बुलबुले, दिख फूटें हों नष्ट जीवन के संघर्ष को, जय कर- मान न कष्ट . दुःख में जपते हरि-हरि, सुख में भूले राम। दारुण विपदा जब ...

सागर में पत्थर – सोनल शर्मा

Sunday, July 28th, 2013
सागर में पत्थर - सोनल शर्मा  बहुत तेज है उस पत्थर का शोर जिसे फैंक दिया है बिच समुद्र के और जो डूबने के बजाय तैरने की कोशिश  करने लगा है वह पत्थर जिन्दगी के उतार - चढ़ाव की तरह लहरों में हिचकोले खा रहा है वह दिशाहीन पत्थर छोर को नही पा  रहा है उसे पता ही नही है कि उसे डूबना है या तैरना ...

मानवता का पुजारी : नागार्जुन

Friday, June 28th, 2013
मानवता का पुजारी : नागार्जुन " नहीं श्मशानी शन्ति चाहिए नहीं वैष्णवी शन्ति चाहिए नहीं भैरवी शन्ति चाहिए नहीं निर्गुणी शन्ति चाहिए हम इच्छुक हैं सगुण शक्ति के " नागार्जुन आधुनिक युग की नव-चेतना के प्रगतिशील कवि हैं. उन्होंने एक ओर तो वर्ग-संघर्ष से समस्त मानवता के प्रति गहन संवेदना व्यक्त करते हुए इसके लिए उत्तरदायी व्यवस्था के विरुद्ध तीव्र ...

नागार्जुन एक परिचय

Friday, June 28th, 2013
 नागार्जुन एक परिचय नागार्जुन (३० जून १९११-५ नवंबर १९९८) हिन्दी और मैथिली के अप्रतिम लेखक और कवि थे। उनका असली नाम वैद्यनाथ मिश्र था परंतु हिन्दी साहित्य में उन्होंने नागार्जुन तथा मैथिली में यात्री उपनाम से रचनाएँ कीं। इनके पिता श्री गोकुल मिश्र तरउनी गांव के एक किसान थे और खेती के अलावा ...

नही हारोगी तुम-डॉ.वेद व्यथित

Wednesday, February 27th, 2013
नही हारोगी तुम-डॉ.वेद व्यथित मैं कैसे मान लूं कि तुम इतनी जल्दी हार जाओगी क्योंकि मैं जानता  हूँ तुम्हार संघर्ष ,तुम्हारा जीवट  , तुम्हारी अन्तस् की तीव्र आंधी मैंने घोर गर्जन के साथ तुम्हारी तडित कौंध को देखा है मूसलाधार वृष्टि से अधिक तुम्हारे आसुंओं की बाढ़  से मैंने बहुत कुछ उजड़ते देखा है तुम्हारे  भयंकर ताप   से बहुत कुछ झुलसने पर उस का ताप ...

राजा बैठे सिंहासन पर, यह ताजों पर आसीन क़लम

Tuesday, February 5th, 2013
राजा बैठे सिंहासन पर, यह ताजों पर आसीन क़लम  राजा बैठे सिंहासन पर, यह ताजों पर आसीन क़लम मेरा धन है स्वाधीन क़लम जिसने तलवार शिवा को दी रोशनी उधार दिवा को दी पतवार थमा दी लहरों को खंजर की धार हवा को दी अग-जग के उसी विधाता ने, कर दी मेरे आधीन क़लम मेरा धन है स्वाधीन क़लम रस-गंगा लहरा देती है मस्ती-ध्वज फहरा देती है चालीस करोड़ों ...

कारवां गुज़र गया -गोपालदास नीरज

Saturday, February 2nd, 2013
कारवां गुज़र गया -गोपालदास नीरज गोपालदास नीरज हिन्दी साहित्य के लिये कॉलेज में अध्यापन से लेकर कवि सम्मेलन के मंचों पर एक अलग ही अन्दाज़ में काव्य वाचन और फ़िल्मों में गीत लेखन के लिये जाने जाते हैं। वे पहले व्यक्ति हैं जिन्हें शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भारत सरकार ने दो-दो बार सम्मानित ...

जयशंकर प्रसाद-‘कामायनी’

Tuesday, January 29th, 2013
जयशंकर प्रसाद-'कामायनी' 'कामायनी' जयशंकर प्रसाद की और सम्भवत: छायावाद युग की सर्वश्रेष्ठ कृति मानी जाती है। प्रौढ़ता के बिन्दु पर पहुँचे हुए कवि की यह अन्यतम रचना है। इसे प्रसाद के सम्पूर्ण चिंतन- मनन का प्रतिफलन कहना अधिक उचित होगा।कामायनी हिन्दी साहित्य के  महाकाव्य के रूप में जानी जाती  है। इस महाकाव्य ...
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