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हो गई पीर पर्वत-सी, पिघलनी चाहिये- दुष्यंत कुमार

Sunday, September 1st, 2013
हो गई पीर पर्वत-सी, पिघलनी चाहिये- दुष्यंत कुमार हो गई पीर पर्वत-सी, पिघलनी चाहिये इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिये आज ये दीवार पर्दों की तरह हिलने लगी शर्त लेकिन थी की ये बुनियाद हिलनी चाहिए हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में, हाथ लहराते हुए लाश चलनी चाहिए सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरी फ़ितरत नहीं मेरी कोशिश है कि ...

दुष्यंत कुमार

Sunday, September 1st, 2013
दुष्यंत कुमार  जन्म:1 सितम्बर, 1933 - मृत्यु: 30 दिसम्बर, 1975) एक हिंदी कवि और ग़ज़लकार थे। समकालीन हिन्दी कविता विशेषकर हिन्दी ग़ज़ल के क्षेत्र में जो लोकप्रियता दुष्यंत कुमार को मिली वो दशकों बाद विरले किसी कवि को नसीब होती है। दुष्यंत एक कालजयी कवि हैं और ऐसे कवि समय काल में ...

काव्येतिहास में महेन्द्रभटनागर का रचना-जगत – वीरेन्द्र आस्तिक

Saturday, June 1st, 2013
काव्येतिहास में महेन्द्रभटनागर का रचना-जगत -  वीरेन्द्र आस्तिक डॉ. महेन्द्रभटनागर का रचनात्मक नीड़ आधुनिक सोच और सामाजिक सरोकारों के महीन तन्तुओं का एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ है।  उनके रचना-कर्म में मुझे ‘नवजागरण’ की पृष्ठभूमि अंतर्निहित-सी दिखाई देती है। नव जागरण के आंदोलनीय प्रभाव को जिन साहित्यकारों ने शिद्दत से आत्मसात किया, उनमें एक नाम डॉ.महेंद्रभटनागर का भी होना चाहिए। ...

कविता – ख़याल – लेखक – विजय निकोर

Wednesday, March 20th, 2013
कविता - ख़याल - लेखक - विजय निकोर तारों से सुसज्जित रात में आज कोई मधुर छुवन ख़यालों की ख़यालों से बिन  छुए  मुझे  आत्म-विभोर  कर  दे, मेरे उद्विग्न मन को सहलाती, हिलोरती, कहाँ  से  कहाँ  उड़ा  ले  जाए,  कि  जैसे जा  कर  किसी  इनसान  की   छाती  से उसकी  अंतिम  साँस  वापस  लौट आए, और  मुंदी-मुंदी  पलकों  के पीछे मुस्कराते वह  पुन:  जीने  का  विशाल  प्रस्ताव स्वीकार ...

आयरिश बमों के फटने की वही आवाजें वही अनुतियाँ-डॉ. सत्येंद्र श्रीवास्तव

Tuesday, March 5th, 2013
आयरिश बमों के फटने की वही आवाजें वही अनुतियाँ-डॉ. सत्येंद्र श्रीवास्तव ( फाल्सरोड, १९७६ ) एक अप्रत्याशित खडकन हुई और खँडहर से निकल कर एक खाशा मोटा चूहा दीवार से सटा हुआ गली से सड़क की ओर भागने लगा । उसे भागता देख पड़ोस की दीवार पर बैठी हुई बिल्ली झटके से कूदी और दीवार से लगी -लगी धीरे - धीरे रुक - रुक कर उसके पीछे जैसे रेंगने लगी फिर दीवार के एक टूटे चरमराते  द्वार  ...

मिलन – विरह -लेखिका कुसुम वीर

Wednesday, February 27th, 2013
मिलन - विरह -लेखिका  कुसुम वीर उत्ताल  तरंगित  लहरें  थीं कुछ व्याकुल थीं कुछ थिरक रहीं तट से मिलने की चाहत में चंचल चपला सी मचल  रहीं दूर किनारे बैठा तट था शांत संयमी संतोषी था लहर दौड़ मिलने आती उसको भी लौटा देता था लहरों का सुखद शील स्पर्श सागर तट को जब छू जाता भीग गया था तन उसका पर रोक न उसको पाया था बहु ...

कविता : जयशंकर प्रसाद

Tuesday, January 29th, 2013
कविता : जयशंकर प्रसाद जीवन परिचय -जयशंकर प्रसाद का जन्म30 जनवरी, 1889 ई० में वाराणसी (उ० प्र०) में पिता श्री देवी प्रसाद साहू के घर में हुआ था जो एक अत्यन्त समृद्ध व्यवसायी थे। प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही प्रारम्भ हुई . काव्य-चित्राधार, कानन कुसुम, प्रेम-पथिक, महाराणा का महत्व, झरना, करुणालय, आंसू, लहर एवं कामायनी। नाटक- सज्जन, ...

उल्लू की पंचायत-आदित्य चौधरी

Friday, January 18th, 2013
उल्लू की पंचायत-आदित्य चौधरी न नई है न पुरानी है सच तो नहीं ज़ाहिर है, कहानी है एक जोड़ा हंस हंसिनी का तैरता आसमान में तभी हंसिनी को दिखा एक उल्लू कहीं वीरान में हंसिनी, हंस से बोली- "कैसा अभागा मनहूस जन्म है उल्लू का जहाँ बैठा वहीं वीरान कर देता है क्या उल्लू भी किसी को खुशी देता है?" तेज़ कान थे उल्लू के भी सुन ...

अंतिम बूँद-गोपाल दास ‘नीरज’

Saturday, January 5th, 2013
अंतिम बूँद-गोपाल दास 'नीरज' गोपालदास सक्सेना 'नीरज' का जन्म 4 जनवरी 1925 को ब्रिटिश भारत के संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध, जिसे अब उत्तर प्रदेश के नाम से जाना जाता है, में इटावा जिले के पुरावली गाँव में बाबू ब्रजकिशोर सक्सेना के यहाँ हुआ था। मात्र 6 वर्ष की आयु में पिता गुजर गये। ...

उदघोषित तकल्लुफ-बाल कृष्ण मिश्र ‘वत्स ‘

Sunday, December 23rd, 2012
उदघोषित तकल्लुफ-बाल कृष्ण मिश्र 'वत्स ' बालकृष्ण मिश्र 'वत्स ' का जन्म गोंडा जिले के जुगराज पुर ग्राम में १५ जुलाई १९८९ को  हुआ।प्राथमिक स्तर की पढाई फैजाबाद जिले से तथा माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर की पढाई गोंडा जिला से की । तत्पश्चात काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक का श्री गणेश किया। स्नातक स्तर की ...
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