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दिव्या माथुर की कहानी : अंतिम तीन दिन अमेरिकी कोर्ट ने सोनिया गांधी से पासपोर्ट दिखाने को कहा अमेरिकी न्यायाधीश ने 1984 के दंगों पर आदेश सुरक्षित रखा यमन में डूबा जहाज, 12 भारतीय नाविक हुए लापता पंजाबी गायक शिंदा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

Posts Tagged ‘hindi writers’


अक्ल और भैंस – फणीश्वरनाथ रेणु

Thursday, March 13th, 2014
अक्ल और भैंस - फणीश्वरनाथ रेणु    जब अखबारों में ‘हरी क्रान्ति’ की सफलता और चमत्कार की कहानियाँ बार-बार विस्तारपूर्वक प्रकाशित होने लगीं, तो एक दिन श्री अगमलाल ‘अगम’ ने भी शहर का मोह त्यागकर, खेती करने का फैसला कर लिया। गाँव में, उनके चार-पाँच बीघे जमीन थी जिन्हें बटाईदारी पर उठाकर, अगमलाल जी ‘अगम’ आज ...

डेनमार्क में रह रहीं प्रवासी लेखिका अर्चना पेन्यूली से वीणापाणी जोशी की बातचीत

Monday, October 28th, 2013
डेनमार्क में रह रहीं प्रवासी लेखिका अर्चना पेन्यूली से वीणापाणी जोशी  की बातचीत ‘‘किसी भी देश की भाषा उसकी सबसे बड़ी ताकत है’’- अर्चना पेन्यूली शताब्दी में तेजी से प्रव्रजन हुआ। एक देश से दूसरे देश आवाजाही का सिलसिला जारी है। ऐसे लोगों की पहचान का अन्तर्द्वन्द उन्हें विचलित किए रहता है। इस विषय में आपके क्या अनुभव हैं? मैं सितम्बर सन् 1997 में तीन ...

विधि में हिन्दी लेखक ब्रजकिशोर शर्मा

Saturday, August 17th, 2013
विधि में हिन्दी लेखक ब्रजकिशोर शर्मा विधि की शब्दावली और विधि का अनुवाद लेखक: ब्रजकिशोर शर्मा पृष्ठ: 248 मूल्य: 225 रुपये प्रकाशक: पी.एच.आई.लर्निंग प्रा.लि. इतिहास, प्रकिया, सिद्धांत और प्रयुक्ति इन चार भागों में बंटी प्रस्तुत पुस्तक अपने विषय पर एक आधिकारिक ग्रंथ है। इतिहास अधयाय के अंतर्गत लेखक ने समकालीन शासकीय स्थिति का लेखा जोखा प्रस्तुत किया है जिसमें राजभाषा के ...

खुशबू बनकर लौटेंगे – अलका सिन्हा

Sunday, June 9th, 2013
खुशबू बनकर लौटेंगे - अलका सिन्हा  (हिंदी के वरिष्ठ लेखक, चिंतक, विचारक देवेन्द्र इस्सर का जाना हमारे लिए मह्त्वपूर्ण क्षति थी । वे एक बड़े कद के लेखक थे। इस अर्थ में बड़े नहीं कि उन्हें बहुत पुरस्कार मिले हों या बड़े पदों या संस्थाओ में रहे हों । वे इसलिए बड़े लेखक थे कि उनका ...

बीते मौसम की यादें- देवेन्द्र इस्सर

Sunday, May 19th, 2013
बीते मौसम की यादें- देवेन्द्र इस्सर ‘‘स्वप्न और स्मृति के बीच के अदृश्य स्पेस में इन कहानियों का सृजन होता है और यूँ शुरू होता है वह सोच सफर जो इन कहानियों के पात्रों को उस दुनिया के रू-ब-रू ला खड़ा करता है जो प्रायः फंतासी की दुनिया नज़र आती है। सच तो यह है कि ...

अज्ञेय की कलम से

Wednesday, March 6th, 2013
अज्ञेय की कलम से "मैं 'स्वान्त:सुखाय' नही लिखता। कोई भी कवि केवल स्वान्त:सुखाय लिखता है या लिख सकता है, यह स्वीकार करने में मैंने अपने को सदा असमर्थ पाया है। अन्य मानवों की भांति अहं मुझमें भी मुखर है, और आत्माभिव्यक्ति का महत्व मेरे लिये भी किसी से कम नही है, पर क्या आत्माभिव्यक्ति ...

सुधीर मौर्य ‘ सुधीर ‘ का परिचय

Wednesday, January 23rd, 2013
 नाम---------------सुधीर मौर्य 'सुधीर' जन्म---------------०१/११/१९७९, कानपुर माता - श्रीमती शकुंतला मौर्या पिता - स्व. श्री राम सेवक मौर्या पत्नी - श्रीमती शीलू मौर्या राज्य---------------उत्तर प्रदेश तालीम-------------अभियांत्रिकी में डिप्लोमा, इतिहास और दर्शन में स्नातक, प्रबंधन में पोस्ट डिप्लोमा. सम्प्रति------------इंजिनियर, और स्वतंत्र लेखन. कृतियाँ------------१) 'आह'  (ग़ज़ल संग्रह), प्रकाशक- साहित्य रत्नालय, ३७/५०, शिवाला रोड, कानपुर- २०८००१ २) 'लम्स' (ग़ज़ल और नज़्म संग्रह) प्रकाशक- शब्द शक्ति प्रकाशन, ७०४ एल.आई.जी.-३, गंगापुर कालोनी, ...

चितकबरे :-हरजेन्द्र चौधरी

Tuesday, August 7th, 2012
चितकबरे :-हरजेन्द्र चौधरी  अभी थोड़ी देर पहले इस चर्मरोगी-मनोरोगी महिला को मैंने एक लंबे क्षण तक देखा तो दिल-दिमाग झटका खा गए कि डॉक्टर संजय वर्मा और डॉक्टर अमित भान की, अस्मिता बहल नाम की, यह पेशेंट कोई और नहीं, मेरी स्कूल क्लासफेलो अस्मिता अरोड़ा ही है। मन में उथल-पुथल सी मची हुई ...

प्रख्यात कथाकार राजी सेठ से रमेश दवे की बातचीत पर आधारित साक्षात्कार लेख

Wednesday, March 21st, 2012
प्रख्यात कथाकार राजी सेठ से रमेश दवे की बातचीत पर आधारित साक्षात्कार लेख मेरी नज़र में सारे लेखक इंट्रोवर्ट होते हैं-राज़ी सेठ जन्मः 4 अक्टूबर, 1935, नौशेहरा , (अविभाजित भारत) शिक्षाः एम.ए अंग्रेजी साहित्य विशेषाध्ययन तुलनात्मक धर्म और भारतीय दर्शन। हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी, उर्दू और गुजराती की भाषा ज्ञान। लेखन की शुरूआत जीवन के उत्तरार्ध में। लगभग सभी विधाओ में लेखन। प्रकाशनः अंधे मोड़ से ...

हिंदी लेखक की जगह – लता शर्मा

Tuesday, February 28th, 2012
हिंदी लेखक की जगह - लता शर्मा हिंदी भाषा करोड़ों लोग बोलते हैं, लेकिन हिंदी की किसी पुस्तक की एक हजार प्रतियां बिक जाएं तो बहुत बड़ी बात है। बहुत गंभीर समस्या है। सवाल है, गिन कौन रहा है। कैसे पता चलता है कि कितनी प्रतियां बिकीं। कितनी प्रकाशित हुर्इं, यह भी किसे पता है। लेखन पर ...
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