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Posts Tagged ‘satire’


हास्य व्यंग्य – नया साल मुबारक – नरेंद्र कोहली

Thursday, October 1st, 2015
हास्य व्यंग्य - नया साल मुबारक - नरेंद्र कोहली    डाकिए ने अपने माथे का पसीना पोंछा और कुछ हाँफते हुए कहा, "नया साल मुबारक हो।" "इस ठंड में इतना पसीना क्यों आ रहा है भाई?"  मैंने कुछ सहानुभूति जताई। वह हँसा, "जब इतना बोझ लाद कर चलूँगा, तो पसीना तो आएगा ही। सारे देश को आ रहा है। साले कार्ड ...

हास्य व्यंग्य कविताएं : सफाई, माफिया – मिलन सिन्हा

Tuesday, July 16th, 2013
हास्य व्यंग्य कविताएं :  सफाई, माफिया -  मिलन  सिन्हा                               सफाई धो डाला सब धो डाला घोटाला सब घोटाला धो डाला जो अब भी मुझ पर कीचड़ उछाले उसी का मुंह काला !  ***** माफिया जिसने  जनता का जेब साफ़ किया उसे बेकदर तबाह किया लेकिन जिसे नेताओं ने अपने साथ किया उसे बिलकुल माफ़ किया वही तो है 'माफिया'.  *****  मिलन सिन्हा  hellomilansinha@gmail.com

दो हास्य व्यंग्य कविताएं : मिलन सिन्हा

Tuesday, June 18th, 2013
दो हास्य व्यंग्य कविताएं  : मिलन सिन्हा  जानकारी नेताजी के भाषण के बीच ही जब कुछ लोगों ने लगाया महंगाई विरोधी नारा तो नेताजी  को गुस्सा आ गया थोड़ा . कहा उन्होंने कुछ जोर से, जो कुछ हो रहा है सरेआम उससे भी आप क्यों रहते हैं बिल्कुल अनजान? सब जानते हैं, जहाँ कुछ चीजों की कीमत बढ़ी है वहीं कुछ चीजों की घटी भी है. मनुष्य की जान, उसका ...

रोना-डॉ. वेद व्यथित

Tuesday, March 19th, 2013
रोना-डॉ. वेद व्यथित रोना एक शारीरिक , मानसिक , सांस्कृतिक , आर्थिक ,राजनितिक  व राष्ट्रिय क्रिया  है ।रोना व्यक्ति के जीवन की महत्वपूर्ण क्रिया है । इस में कोई शक नही है । रोने से ही व्यक्ति महान बनता है और मिडिया का विषय बनता है , अखबारों की हेड लाइन बनता है , ...

स्वादिस्ट सूप – ऋतु शर्मा

Thursday, February 21st, 2013
स्वादिस्ट सूप - ऋतु शर्मा र्र्र्र्र्र्र ,र्र्र्र्र्र्र्र्र , हे ये कैसी आवाज़ है ? ओह ,,,ये आवाज़ तो बड़े किसान के पेट से आ रही है . लगता है पेट खाली  है  ,भूख लगी है, बड़े किसान को ,अब क्या करूँ ? क्या बनाऊं जो जल्दी से बन जाए और स्वादिस्ट भी हो ,छोटा किसान ...

कुश्ती में धर्मं

Thursday, January 17th, 2013
कुश्ती में धर्मं वह डंडा लेकर उस मैदान में लड़ने पहुंचे। यह मैदान ‘धर्मकुश्ती’ के लिये विख्यात था। मैदान के मध्य में उन दोनों ने अपने अपने धर्म का नाम लेकर लड़ाई शुरु की। पहले एक दूसरे पर डंडे से प्रहार करते-साथ में अपने धर्म की जय भी बोलते जाते। डंडे से डंडे ...

घण्टी बिल्ली के गले में बाँधेगा कौन?

Monday, January 7th, 2013
 घण्टी बिल्ली के गले में बाँधेगा कौन? कब मिटेंगे आतंक के साये हर रोज यही सवाल बेचैन करता रहता है? जब कभी घर के किसी सदस्य को चोट लग जाती है हम परेशान हो जाते हैं, देखो सम्भलकर चलना कहीं ठोकर न लग जाये, जल्दी घर लौटना, किसी अजनबी से बात मत करना। न जाने कितनी ही ...

शिक्षक का मनोयोग-व्यंग

Saturday, December 15th, 2012
शिक्षक का मनोयोग-व्यंग उस दिन वह शिक्षक अपनी पत्नी के ताने सुनकर घर से निकला था इसलिये उसकी मनस्थिति डांवाडोल हो गयी थी। दरअसल वह शिक्षक अपने यहां पढ़ने वाले छात्रों को बड़े मनोयोग से पढ़ाता था इसलिये उसके विषय में बच्चों का ज्ञान अच्छा हो गया था। अतः उसके यहां कोई ट्यूशन ...

तकिया कलाम – डॉ वेद व्यथित

Wednesday, November 21st, 2012
तकिया कलाम - डॉ  वेद व्यथित मेरे मित्र भरोसे लाल का कुछ दिन से यह तकिया कलाम ही बन गया है कि स्वतन्त्रता मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है |सुनने में और बोलने में भी यह यह बहुत ही अच्छा लगता है | इस  लिए भाई भरोसे लाल, दिन में मिनट दो मिनट के बाद, इस नारे ...

रिज्युमे – डॉ.वेद व्यथित

Friday, October 19th, 2012
रिज्युमे - डॉ.वेद व्यथित दाढ़ी वाले लम्बे तगड़े दो युवक मेरे मित्र भाई भरोसे लाल की दुकान पर आये । उन्होंने आते ही भाई भरोसे लाल से कहा कि 'अंकल हमे नौकरी के लिए चिठ्ठी लिखवानी है । मैं और मेरा मित्र भरोसे लाल उन की नौकरी के लिए चिठ्ठी को नही ...
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