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दिलों व रिश्तों की कहानी का अद्भुत संगम


It Started With a Friend requestदोस्ती और रिश्तों को शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है। यह एक ऐसा एहसास है जिसे भावनाओं में ही व्यक्त किया जा सकता है। इसी एहसास को शब्दों के रूप में अपनी किताबों में उकेरा है युवा लेखक सुदीप नागरकर ने। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से दोस्ती और रिश्तों की नई परिभाषा गढ़ी है। उनकी कहानियां जिंदगी की सच्चाई और उनके निजी जीवन के एकदम करीब है।

1. ‘फ्यू थिंग्स लेफ्ट अनसेड’ : साल 2011 में आई यह किताब युवाओं में बहुत लोकप्रिय है। अब तक इसकी एक लाख से ज्यादा प्रतियां बिक चुकी हैं। इस किताब में लेखक ने कहा है कि प्यार किसी भटके हुए को राह भी दिखा सकता है। एक बंदा जो अपने लक्ष्य से अंजान होता है उसे उसका प्यार ही उसके लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करता है।

2. ‘देट्स द वे वी मेट’ : साल 2012 में आई इस किताब ने भी युवाओं के बीच खूब धूम माचाया है। इसमें लेखक ने संदेश दिया है कि वक्त के साथ-साथ रिश्ते नहीं बदलते हैं। सच्चे प्यार को भुलाया नहीं जा सकता, सच्चे प्यार को कई सारे उतार-चढ़ाव से गुजरना पड़ता है। वक्त सच्चे प्यार का इम्तहान लेता है।

3. ‘इट स्टार्टेड विद ए फ्रैंड रिकवेस्ट’ : इस साल 2013 में आई यह किताब भी जीवन के उतार-चढ़ाव पर ही आधारित है।

सुदीप से बातचीत पर आधारित कुछ अंश :-

सोशल साइट्स रिश्ते बनाने में कितनी मदद करते हैं?

मैं मानता हूं कि आज के समय में सोशल साइट्स रिश्ते और दोस्ती बनाने में काफी मदद करते हैं, लेकिन ये रिश्ते कितने दिन चल पाते हैं इसकी गारंटी लेना मुश्किल है। यहां दोस्त बड़ी आसानी से बन जाते हैं लेकिन वक्त पर कितने दोस्त आपकी मदद के लिए खड़े होते हैं इस पर संशय है।

कौन है आपकी कहानियों की प्रेरणा?

मेरी कहानियां किसी सपने जैसी नहीं है, रोजमर्रा की जिंदगी में हम जिन रिश्तों से टकराते हैं, दोस्ती के जिस पहलुओं से रू-ब-रू होते हैं उसपर ही लिखी गई है। आज की युवा पीढ़ी जिनका रिश्ते और दोस्ती पर से यकीन कहीं खत्म सा होता जा रहा है, ये कहानियां उन्हें दोस्ती और सच्चे प्यार की अहमियत समझने में मदद करेगी। मुझे किसी और से नहीं बल्कि खुद के अनुभव से ही प्रेरणा मिली है। जब पहली बार रिश्तों में धोखा मिला तब सही और गलत की पहचान हुई। जब दर्द को बयां नहीं कर पाया तब उसे अपनी ताकत बना लिया और लिखने लगा।

कैसा रहा इंजीनियरिंग से लेखक बनने का सफर?

घर वालों के दवाब में आकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन कभी भी खुद को खुल कर नहीं रख पाया। हमेशा से ही साहित्य के प्रति एक रूची रही है। अपनी पर्सनल डायरी लिखता था कब लेखक बन गया पता ही नहीं चला। हालांकि इंजीनियरिंग के क्षेत्र में मुझे बहुत कुछ सिखाया है।

बाजार में इन दिनों कई नए लेखक उभर कर आ रहे हैं, इस दौड़ में आप अपने आप को कहां देखते हैं?

बिल्कुल सही कहा, आज की युवा पीढ़ी को उनके टेस्ट के मुताबिक किताबें न मिलें तो वे नहीं पढ़ते। आजकल बहुत सारे लेखक हैं जो युवाओं की पसंद बने हुए हैं, ऐसे में खुद को सबसे अलग रखना जरी कठिन है। कई लेखक हैं जो प्यार, दोस्ती इन सब पर लिखते हैं, लेकिन मैं खुद को उनसे अलग देखता हूं क्योंकि मेरी कहानियां सच्ची घटनाओं पर आधारित है। वो घटनाएं जो हर लड़के या लड़की की जिंदगी में कभी न कभी हुई है। वे खुद को इससे जोड़ पाते हैं। आगे भी मैं इसी तरह की कहानियों पर ही किताबें लिखूंगा। साल 2014 में मेरी चौथी किताब बाजार में आ जाएगी।

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